Wednesday, August 4, 2021

बिहार: सुशासन में आर्थिक विकास दर दो अंको में बरकरार, किसानों का रहा अहम योगदान

पिछले कई सालों में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट आई है। वहीं, बिहार की आर्थिक विकास दर दो अंको में जारी रही है। दरअसल, बिहार विधानसभा में आर्थिक सर्वे 2020-21 प्रस्तुत किया गया है। इस सर्वे में बिहार की आर्थिक विकास दर 2019-20 में 10.5 प्रतिशत रही है। यह आंकड़ा उस वक्त देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की दर से 4.2 प्रतिशत अधिक है।

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इसका मुख्य कारण प्रदेश में तृतीयक क्षेत्र में शामिल सेक्टरों में वृद्धि होना है। प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र में शामिल सेक्टरों में कम वृद्धि दर दर्ज हुई है। बिहार के इस दो अंको की विकास दर में सबसे बड़ी भूमिका कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों की है। वर्ष 2019-2020 में सकल घरेलू राज्य उत्पाद में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 18.7 फीसदी है।

अन्य क्षेत्रों का योगदान

वहीं, उद्यमिता क्षेत्र का 11.7 प्रतिशत योगदान रहा है। जबकि पशुधन का एसजीडीपी में करीब छह प्रतिशत का योगदान रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वर्ष 2015-16 से 2019-20 के बीच करीब 6 फीसदी की औसत वार्षिक दर से वृद्धि हुई है। अधिसंरचन एवं संचार क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत का योग दान है। इसके अलावा अन्य सेवाओं का 13.8 प्रतिशत और पथ परिवाहन का 5.9 फीसदी योगदान है। सर्वे में उम्मीद जताई जा रही है कि प्राथमिक क्षेत्र में क्षमता वृद्धि से आने वाले वर्षों में प्रदेश में उच्च विकास दर देखने को मिलेगी।

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मूलभूत आवश्कताओं का रखा ध्यान

इस 15वें आर्थिक विकास सर्वेक्षण में जिस तरह से बिहार की विकास दर रही है, उसमें बेहतर वित्तीय प्रबंधन का बड़ा हाथ है। यदि दूसरी और सरकारी खर्च की बात करें तो इसमें सबसे ज्यादा आधारभूत संरचना विकास पर ज्यादा जोर दिया गया है। यदि सरकार की प्राथमिकताओं को पांच बिंदुओं में बाटा जाए तो पहला बिंदु आर्थिक विकास दर है। इसके बाद सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं पर खर्च किया गया है।

प्रवासियों के लिए भी किया काम

बिहार सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण को भी प्राथमिकता दी है। अगर कृषि और पर्यावरण की बात करें तो अलग कृषि फीडर से कृषि क्षेत्र तक को बढ़ावा दिया है। वहीं, सरकार ने जल जीवन हरियाली अभियान से हर खेत में पानी पहुंचाने का काम किया है। इसके अलावा पांचवे बिंदु में प्रवासियों के लिए किया गया काम है। इसमें उनके लिए खान-पान, स्वास्थ्य औऱ रोजगार की चिंता की गई है।

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