Saturday, October 16, 2021

कच्चे तेल का भाव तेजी से गिर रहा है, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं, ऐसा क्यों?

नई दिल्ली, न्यूज डेस्क। बीते एक महीने में कच्चे तेल की कीमत में 9 प्रतिशत की गिरावट आई है. मार्च में इसकी कीमत $70 प्रति बैरल थी, जो अब गिरकर $63 प्रति बैरल से भी कम हो गई है. लेकिन पिछले एक महीने में हमारे देश में पेट्रोल 61 पैस और डीजल 60 पैसे ही सस्ता हुआ. जब कच्चे तेल का दाम सस्ता हुआ है तो हमें इसका फायदा मिलना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों के साथ हमारा रुपया भी तेजी से गिरता जा रहा है.

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दरअसल, सिर्फ बुधावर को डॉलर के मुकाबले रुपए में 105 पैसे की गिरावट आई है. जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है. इसके साथ ही रुपए का दाम डॉलर के मुकाबले 74.47 चला गया है और भारत कच्चे तेल को डॉलर में खरीदता है. इसका मतलब कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत को पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. हालांकि, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को आश्वासन दिया था कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के गिरते दामों का फायदा देश के लोगों को जरुर मिलेगा. यानी उनके हिसाब से देखें तो पिछले महीने से लेकर अब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में 2 रुपए की कटौती हो जानी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

तेजी आ रही है गिरावट

रुपए और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह कोविड19 (Covid19) है. कोरोना के कहर की वजह से दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में तेल की मांग में कमी होने की आशंका है. साथ ही रुपए में भी भारी गिरावट आ सकता है. रुपए में गिरावट आने का कारण बढ़ती हुई महंगाई और रिजर्व बैंक का इस तिमाही में नया 1 लाख करोड़ रुपए का बांड खरीदने का फैसला लेना है. वहीं, केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार ओपेक देशों ने मई से तेल के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला लिया है. जिससे तेल के दामों में कमी आएगी.

स्थिति में हआ था सुधार

21 अप्रैल 2020 में 1 डॉलर 77 रुपए के बराबर था. जिसके बाद रुपए की स्थिति में कुछ महीने सुधार रहा. 23 मार्च 2021 को रुपए सबसे अच्छे स्तर 72.27 पर पहुंच गया था लेकिन यह सुधार ज्यादा दिन तक नहीं रहा क्योंकि रुपए की स्थिति में आया यह सुधार डॉलर में आई गिरावट और देश में FDI और FPI इंवेस्टमेंट की वजह से था. लेकिन अब हालात बिल्कुल इसके उलट हो गई है.

रुटफॉरेक्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर और डायरेक्टर नितेश शर्मा का कहना है कि धीरे-धीरे रुपया गिरते हुए 76.5 से 77 तक आ सकता है. इसकी वजह कोरोना का डर और RBI की नीतियां होंगी. साथ ही उनके अनुसार आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत $55 हो जाएगी.

लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ नागरिकों को तभी मिलेगा, जब ऐसा तेल कंपनियां और सरकारें चाह लें. लेकिन रुपए में आई गिरावट की वजह से आयात, विदेश में शिक्षा, ट्रैवलिंग, विदेश में निवेश और इलाज के खर्चों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा. अगर आप विदेश में बिजनेस करते हैं या आप NRI हैं तो विदेश से घर पैसे भेजने में आपको फायदा होगा. लेकिन वहीं, यदि आपको इन्वेस्टमेंट और बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे विदेश भेजने हैं तो रुपए में आई गिरावट के कारण आपको हजारों -लाखों का नुकसान होगा.

बीते 10 सालों में विदेश में पैसे भेजने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है. साल 2019-20 में LRS के तहत करीब 1.40 लाख करोड़ रुपए विदेश भेजे गए थे. वहीं, 2013-14 में 8.14 हजार करोड़ रुपए LRS के तहत भेजे गए थे. हम आपक बता दें, LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत आप विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों की देखभाल, उन्हें गिफ्ट देने, विदेश में एजुकेशन, ट्रैवल और शेयर या संपत्ति खरीदने के लिए पैसे भेज सकते हैं.

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