Thursday, August 5, 2021

अच्छे दिन: पेट्रोल-डीजल के बाद प्याज की कीमतों में लगी आग, मार्केट में 50 रुपए प्रति किलो पहुंचा दाम

पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने पहले से ही घरेलू बजट बिगाड़ रखा है और अब प्याज की कीमतों ने भी रुलाना शुरु कर दिया है। खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 50 रुपए/ किलो पहुंच गई है। सरकार को उम्मीद है कि मार्च में प्याज का स्टॉक बढ़ जाएगा और उससे कीमतों में कमी आएगी।

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अचानक से प्याज की कीमतों में बढ़ोत्तरी की वजह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बेमौसम बरसात है। प्रदेश में इन दिनों बेमौसम बरसात और ओले पड़ने की वजह से प्याज की फसलें खराब हो गई हैं। जिसकी वजह से एशिया की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में प्याज के दाम 4200 रुपए प्रति कुंतल पहुंच गए। क्योंकि, मंडी में प्याज कम आ रहे हैं।

सरकार को उम्मीद है कि मार्च में प्याज की आमद बढ़ने से कीमतों मे कमी आएगी, लेकिन कई जानकारों का मानना है कि अभी प्याज की कीमतों में कमी नहीं आएगी। उनके दाम अभी और बढ़ेंगे। कई लोग प्याज की बढ़ती कीमतों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से जोड़ कर देख रहे हैं, क्योंकि सरकार ने पिछले साल आलू, प्याज, दाल, चावल और तिलहन को इसके दायरे से बाहर कर दिया था।

महंगाई को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर किया हमला

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पेट्रोल-डीजल और रसोई के बढ़ते दामों को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, कि सरकारों का चुनाव लोगों के हितों पर हमला करने के लिए नहीं होता है, बल्कि उनके बोझ को कम करने के लिए होता है। पेट्रोलियम के दामों को कम करने की मांग उठाते हुए कहा कि मध्य वर्ग, किसान और गरीबों को लाभ मिलना चाहिए।

पीएम को लिखा पत्र

सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र भी लिखा। जिसमें उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में ईंधन के दाम अधिकतम ऊंचाई पर हैं, जो पूरी तरह से अव्यवहारिक है। देश के कई हिस्सों में पेट्रोल के दाम 100 के पार जा चुके हैं। डीजल के बढ़ते दामों ने किसानों को और परेशानी में डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का दाम मध्यम स्तर पर है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दामों को बढ़ाना मुनाफाखोरी का उदाहरण है।

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सरकार ने 21 लाख करोड़ रुपए कमाए: सोनिया गांधी

पीएम मोदी को लिखे पत्र में सोनिया गांधी ने कहा, यह बात समझ से परे है कि कोई सरकार इतनी बेपरवाह और असंवेदनशील उपायों को कैसे सही ठहरा सकती है। सरकार ने पिछले छह सालों मे डीजल पर 820 फीसदी और पेट्रोल पर 258 फीसदी उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 21 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर वसूली की है। पर इस मुनाफाखोरी का लोगों को कोई फायदा नहीं मिलेगा।

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