Wednesday, August 4, 2021

अमेरिकी रिसर्च सेंटर के अनुसार 2050 तक मुस्लिम आबादी हिंदुओं की दोगुनी होगी

न्यूज डेस्क। दुनियाभर के देश जनसंख्या कंट्रोल करने की कोशिश करने में लगे. क्योंकि सभी जानते हैं अगर जनसंख्या तेजी से बढ़ी तो संसाधनों की कमी हो जाएगी. जिसके कारण देश में बेरोजगारी, भुखमरी और अन्य समस्याएं पैदा होने लगेंगी.कुछ देशों ने जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए कानून तक बना दिए हैं. भारत भी इस पर विचार कर रहा है. लेकिन दुनिया में कुछ लोग हैं जो इस पर आंखे बंद किए हुए हैं. इस्लामिक दुनिया विश्वभर के अन्य समुदायों की तुलना में 150% अधिक प्रजनन कर रहे हैं.

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ऐसा हम नहीं बोल रहे हैं, यह दुनिया का सबसे लिबरल देश अमेरिका की Fact tank प्यू रिसर्च सेंटर कह रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के सबसे धर्म के लोग महज 11% (स्थानीय उपासना पद्धति) से लेकर 34-35% ( ईसाई-हिंदू) की दर से बढ़ रहे हैं. वहीं, बौद्ध मतावलंबी 0.3% की दर से घट रहे हैं. जबकि 73% से ज्यादा की दर से इस्लाम बढ़ रहा है, वो भी कैसे- बच्चे पैदा करके. वैसे भी दुनिया में संसाधनों की कमी है ऐसे में यह खबर बेहद निराशाजनक और चिंता का विषय है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्यू के शोकर्ताओं ने बताया है कि आने वाले 30 वर्षों में दुनिया की आबादी बढ़कर करीब 930 करोड़ हो जाएगी. जो 2010 के आंकडों से 35 प्रतिशत अधिक होगी. रिपोर्ट के आंकड़ो को देखते हैं तो कुछ मजहब जैसे यहूदी, बहाई आदि की आबादी दुनिया की औसत आबादी वृद्धि दर की आधी दर से बढ़ रही है. वहीं, ईसाई और हिंदुओं की आबादी औसत दर से बढ़ रही है. यानी अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति मुस्लिमों की है, जिनकी आबदी औसत दर से दोगुनी बड़ रही है.

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मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है.

इस रिपोर्ट में अगर प्रतिशत के अलावा संख्याओं की बात करें तो ईसाई 2010 के 216 करोड़ से बढ़कर 2050 में 290 हो जाएंगे. वहीं हिंदू 2010 में 103 करोड़ से 2050 में 138 करोड़ होंगे. लेकिन वहीं, मुस्लिम आबादी 2010 से 159 करोड़ से करीब 276 करोड़ हो जाएगी.

प्यू की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में fertility rate 2.5 के आस-पास है. अब fertility rate क्या है? चलिए हम आपको बताते हैं. fertility rate का मतलब है किसी भी समुदाय या समूह में प्रति महिला कितने बच्चे पैदा करती है. दुनिया में आबादी का संतुलन बना रहे इसके लिए ज्यादातर समाज शास्त्रियों का मानना है कि आदर्श fertility rate 2.1 है, यानी घर में दो बच्चे.

समाज शास्त्रियों का कहना है कि ऐसे में वे दो बच्चे अपने मां-बाप के मरने के बाद उनका स्थान ले लेंगे. इससे लम्बे समय तक दुनिया पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. लेकिन पूरी दुनिया का औसत fertility rate 2.5 है. जो आदर्श दर से ज्यादा है, जो अभी चिंताजनक नहीं है. अगर जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जनसंख्या विस्फोट के नुकसान के बारे में बताए और हम दो हमारे दो के लिए प्रोत्साहन दें, तो कुछ दशकों में यह दर 2.5 से खिसककर 2.1 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा.

यदि हिंदुओं की fertility rate को देखा जाए तो उनकी 2.4 है, यानी हिंदू आबादी रोकथाम की ओर अग्रसर है. लेकिन इस्लाम की ओर देखें तो मुस्लिमों की fertility rate 3.1 है, जो दुनिया की जरूरत का 150 फीसदी अधिक है. मतलब हर मुस्लिम युगल अपने दो के बजाए तीन इंसान का बोझ दुनिया पर छोड़कर जाता है.

(नोट- बता दें, इस गणित में मुस्लिमों के बहु-विवाह के सिद्धांत को नहीं जोड़ा है, जिसमें मुस्लिम पुरुष को 4 बीवियां तक रखने की इजाजत है. अगर इसको शामिल करते तो फिर यह आंकड़ा कहता कि एक मुस्लिम पुरुष और उसकी चार बीवियां मृत्यु के बाद औसतन 12 वंशजों को छोड़कर जाते यानी मरे 5 आए 12, 6 अतिरिक्त बोझ)

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड: दरगाह पर दो गुटों के बीच जमकर चले लाठी डंडे, इबादत के लिए पहुंचे थे मजार पर

 

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