Saturday, October 16, 2021

पीएम मोदी ने जिस वैक्सीन का डोज लिया, वह कोरोना वायरस से लड़ने में 81% असरदार साबित हुई

न्यूज डेस्क। पीएम नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के AIIMS में कोरोना वैक्सीन का पहला डोज लिया. अस्पताल में उन्हें भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन लगाई गई. अब बताया जा रहा है कि कोरोना वायरस से लड़ने में स्वदेशी कोवैक्सीन 81 प्रतिशत असरदार साबित हुई है.

- Advertisement -

जब भारत बायोटेक ने बुधवार शाम कोवैक्सीन के तीसरे फेज के अंतरिम नतीजे जारी किए तो उनके विरोधियों के मुंह पर ताला पड़ गया. इस वैक्सीन के नतीजे इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए देश में दो ही वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसमें एक भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और दूसरी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोवीशील्ड है.

अभी तक इन दोनों वैक्सीनों में से कोवीशील्ड को प्राथमिकता दी जा रही थी, क्योंकि यह वैक्सीन 72% असरदार थी. लेकिन अब जब भारत बायोटेक की वैक्सीन के नतीजे आ गए हैं, तो अब यह साफ है कि कोवीशील्ड की अपेक्षा कोवैक्सीन ज्यादा असरदार है.

बता दें, कोवीशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर बनाया गया है. इसे भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तैयार कर रही है. वहीं, हैदराबाद की भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी (NIV) के साथ मिलकर कोवैक्सीन का निर्माण किया है.

नतीजे क्यों अहम?

  • 3 जनवरी को भारत सरकार ने कोवैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दे दिया था. उस समय कहा गया था कि वैक्सीन के फेज-3 के नतीजे नहीं आए हैं. ऐसे में वैक्सीन को क्लीनिकल ट्रायल मोड में अप्रूवल मिला. यानी जिनको वैक्सीन दी जाएगी, उन पर नजर रखी जाएगी.
  • इस स्वदेशी वैक्सीन को लेकर कई विशेषज्ञों और पॉलिटिकल पार्टी के नेताओं ने सरकार पर धावा बोला था. जिसकी वजह से कोवैक्सीन को लेकर लोगों में अविश्वास पैदा हो गया था. अब इसके फेज-3 के नतीजों ने आलोचकों को मुंह तोड़ जवाब दिया है.
  • कोवैक्सीन के फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में 25 हजार 800 लोग शामिल हुए थे. वॉलंटियर्स के हिसाब से यह देश का सबसे बड़ा क्लीनिकल ट्रायल है. वहीं, पहले और दूसरे फेज में करीब एक हजार वॉलंटियर्स शामिल हुए थे.
  • फेज-3 में शामिल 43 वॉलंटियर्स कोरोना वायरस की चपेट में आए. इनमें 36 प्लेसिबो ग्रुप और 7 वैक्सीन ग्रुप के थे. इस हिसाब से वैक्सीन की इफेक्टिवनेस 80.6% निकलकर आई.
  • इस क्लीनिकल ट्रायल में शामिल हुए 2,433 वॉलंटियर्स की उम्र 60 साल या उससे अधिक थी. इसके अलावा 4,500 वॉलंटियर ऐसे थे, जो पहले से किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे. इन पर भी कोवैक्सीन का रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा है.

कोवैक्सीन बेहतर क्यों?

  • भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कोवैक्सीन को बनाया गया है. वैक्सीनेशन का मौजूदा नेटवर्क वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री तापमान पर स्टोर कर सकता है. इसके हिसाब से कोवैक्सीन को स्टोर करना बहुत आसान है.
  • इस वैक्सीन के साथ ओपन बॉयल की पॉलिसी मिलती है. यानी वैक्सीन की बोतल खुलने के बाद 25 से 30 दिन के अंदर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है. जिसकी वजह से वैक्सीन का वेस्टेज 10-20 प्रतिशत तक कम होता है.
  • कोवीशील्ड में इस तरह की सुविधा नहीं है. वैक्सीन की बॉटल खुलने के बाद उसे चार घंटे के अंदर इस्तेमाल करना होता है. जिसकी वजह से कोवीशील्ड वैक्सीन काफी ज्यादा बर्बाद हुई थी.
  • कोवैक्सीन को वायरस को ध्यान में रखकर बनाया गया है. वायरस में हल्के-फुल्के बदलाव आने पर इस वैक्सीन का असर कम नहीं होगा. वहीं, कोवीशील्ड दक्षिण अफ्रीका में पाए गए नए कोविड स्ट्रेन के सामने बेअसर साबित हुई है.

अंतरिम नतीजों का मतलब क्या है?

  • भारत बायोटेक ने शुरूआती नतीजों में 43 वॉलंटियर्स के इंफेक्ट होने पर डेटा एनालिसिस किया है. जब 87 मामले सामने आएंगे, तो एकबार फिर से डेटा का एनालिसिस किया जाएगा. 130 केस सामने आने पर आखिरी बार डेटा का एनालिसिस किया जाएगा, जो अंतिम रिपोर्ट होगी.
  • कंपनी ने दावा किया है कि दुनियाभर के 40 देशों ने कोवैक्सीन में रुचि दिखाई है. उन्होंने वैक्सीन के सेफ्टी और इम्यून रिपॉन्स को लेकर भरोसा जताया है. फाइनल रिपोर्ट आने के बाद उनका यह भरोसा और मजबूत होगा.

यह भी पढ़ें- कोविन ऐप पर नहीं हो रहा है वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन, जानिए सरकार की नई गाइडलाइन

- Advertisement -

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

135FansLike

Latest Articles