Thursday, August 5, 2021

पंजाब: केंद्र सरकार की इस चिट्ठी ने पंजाब में हंगामा मचा दिया

चंढीगढ़। केंद्र सरकार की एक चिट्ठी ने पंजाब में बवाल मचा दिया. यह चिट्ठी पंजाब में काम कर रहे कृषि मजदूरों के बारे में है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस चिट्ठी में केंद्र सरकार ने आरोप लगाते हुए लिखा है कि पंजाब के जमींदार उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों को नशे का आदी बना देते हैं और फिर उन्हें बंधुआ मजदूरों की तरह रखते हैं.

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इसमें कहा गया है कि कई मजदूरों से घंटों काम करवाया जाता है और नाममात्र वेतन दिया जाता है. सरकार का दावा है कि नशे की लत लगने के कारण यह लोग बंधुआ मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं.

BSF कार्रवाई का किया जिक्र

दरअसल, यह पूरा मामला BSF ( सीमा सुरक्षा बल) की एक कार्रवाई से जुड़ा है. जिसकी चर्चा इस चिट्ठी में की गई है. इसमें केंद्र सरकार ने कहा है कि BSF की इस कार्रवाई में पंजाब के सीमावर्ती जिलों से करीब 58 मजदूरों को जमींदारों के चंगुल से निकाला गया था. जिनमें अमृतसर, गुरदासपुर, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे जिले शामिल हैं. बता दें, BSF ने यह कार्रवाई 2019 और 2020 के दौरान की थी.

पंजाब में जमींदार बंधुआ मजदूर बना रहे

मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र की इस चिट्ठी में कहा गया है कि पंजाब के जमींदारों ने इनको बंधुआ मजदूरों की तरह रखा था. इनमें से कुछ मजदूरों को नशे की लत लगाकर उनसे मुफ्त में या बहुत कम पैसे देकर घंटो काम करवाया जा रहा था. चिट्ठी में दावा बताया गया है कि BSF को कई मजदूर मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार मिले थे.

मानव तस्करी का दावा

इस चिट्ठी में केद्र सरकार ने दावा किया है कि यह मामला मानव तस्करी से जुड़ा हो सकता है. जिसमें यूपी-बिहार के दूर-दूराज के इलाकों से मजदूरों को काम के बहाने यहां लाया गया और फिर बंधुआ मजदूर बना दिया गया. चिट्ठी के में केंद्र सरकार नें पंजाब के डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी से अपील की है कि वे इस मामले की जांच करें.

चिट्ठी को किसान आंदोलन से जोड़ा गया

केंद्र सरकार की चिट्ठी आने के बाद पंजाब में राजनीति गरमा गई. पंजाब सरकार और राज्य के तमाम राजनीतिक पार्टियों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने इस चिट्ठी को किसान आंदोलन से जोड़ा. उनका कहना है कि केंद्र सरकार पंजाब के किसानों बदनाम करने की कोशिश कर रही है.

पंजाब के जेल मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि पंजाब बंधुआ मजदूरी जैसे कोई मामले नहीं. केंद्र सरकार को अपनी चिट्ठी तुरंत वापस लेनी चाहिए. इस तरह से पंजाब के किसानों को बदनाम नहीं करना चाहिए. वहीं, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने भी इस चिट्ठी को केंद्र सरकार की साजिश कहा है. उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन की वजह से केंद्र सरकार बैकफुट पर चली गई. इसलिए वह किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रही है.

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