Thursday, August 5, 2021

हम इधर बॉयकट-बॉयकॉट कहते रह गए और उधर चीन का शेयर 3% बढ़ गया

आज से 8 महीने पहले 15-16 जून की रात जब लद्दाख के गलवान में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच खूनी झड़प हुई थी. इस झड़प में हमारे देश के 20 जवान शहीद हुए थे. चीन के भी 40 से अधिक जवान मारे गए थे. तब इसके बाद देश में चीन के खिलाफ एक कैंपेन चालू हुआ.

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सभी लोग सोशल मीडिया पर #BoycottChineseProducts और #BoycottChina जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे थे. अब यहां पर आप को सोचना है कि सोशल मीडिया पर जो कैंपने चलाया क्या हम उसमें सफल हुए? आंकड़े तो नहीं कहते हम सफल हुए.

इम्पोर्ट में चीन की हिस्सेदारी 3% बढ़ी

इसके संबंध में मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स पर नवंबर 2020 तक के आंकड़े उपलब्ध हैं. इसके अनुसार भारत ने 2020-21 में अप्रैल से नवंबर के बीच जितना सामान खरीदा है उनमें से 18 प्रतिशत चीन से आया है.

वहीं, 2019 में अप्रैल-नवंबर में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत के पास था. यानी हमारे इम्पोर्ट में चीन की हिस्सेदारी  3% बढ़ गई है. यह तब हुआ जब हमारा इम्पोर्ट 28% से ज्यादा घट गया है. हालांकि हमारा चीन से इम्पोर्ट 12% तक घटा है, लेकिन चीन कुल इम्पोर्ट में हिस्सेदारी बढ़ने का मतलब है कि हमने चीन से ज्यादा सामान लिया है.

भारत ने अप्रैल से नवंबर के बीच 16.33 लाख करोड़ रुपए का सामान बाहर से खरीदा है. जिसमें से 2.89 लाख करोड़ का सामान चीन से लिया गया है. इसी तरह भारत ने दूसरे देशों को 13 लाख करोड़ का सामान बेचा है. जिसमें 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का सामान चीन को बेचा गया है.

चीन से सबसे ज्यादा खरीदा जाने वाल सामान

इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इक्विपमेंट ₹90,523 करोड़
न्यूक्लियर रिएक्टर ₹60,569 करोड़
ऑर्गेनिक केमिकल्स ₹41,659 करोड़
फर्टिलाइजर ₹9,804 करोड़
प्लास्टिक आर्टिकल ₹9,695 करोड़
(सोर्स: मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)

कभी यूएई हुआ करता था हमारा सबसे बड़ा कारोबारी

2011-12 से पहले हमारा सबसे कारोबारी देश यूएई हुआ करता था. लेकिन इसके बाद चीन ने यूएई की जगह ली. 2011-12 से लेकर 2018-19 तक चीन हमारा सबसे बड़ा करोबारी देश रहा है. फिर 2018-19 में अमेरिका ने चीन की जगह ले ली और अमेरिका भारत का सबसे बड़ा कारोबारी देश बन गया. यह सिलसिला दो साल तक चला. इसके बाद फिर से चीन भारत का सबसे बड़ा कोराबारी देश बन गया.

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चीन के साथ ट्रेड बैंलेस काफी ज्यादा है

प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में अप्रैल से नवंबर के बीच भारत और चीन के बीच 3.91 लाख करोड़ का कारोबार हुआ है. चीन के साथ कारोबार करने का घाटा यह है कि हमारा ट्रेड बैंलेस बहुत ज्यादा रहता है. मतलब हमने चीन से सामान खरीदा ज्यादा लेकिन उसे बेचा कम. अप्रैल-नवंबर के बीच हमारा चीन के साथ ट्रेड बैलेंस 1.87 करोड़ रुपए ज्यादा रहा.

देश

कारोबार

ट्रेड बैलेंस

चीन

₹3.91 लाख

-₹1.87 लाख

अमेरिका

₹3.55 लाख +₹1.11 लाख

यूएई

₹1.69 लाख

-₹25,352

हॉन्गकॉन्ग

₹1.18 लाख

-₹23,161

जर्मनी

₹97,542

-₹24,818

आंकड़े अप्रैल से नवंबर 2020 के बीच के हैं

(सोर्स: मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री)

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