Tuesday, August 3, 2021

असल जिंदगी का ‘टाइगर’ खा रहा दर-दर की ठोकर, कभी देश को पाक की खुफिया इनपुट देता था

रायफल और जेट स्पीड सुविधा वाली चमचमाती बीएमडब्ल्यू, ऐशो आराम की जिंदगी, बड़ी पार्टियां। सीक्रेट एजेंट की ऐसी लाइफस्टाइल सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलती है। चाहे वो जेम्स बॉन्ड  हो या हिन्दी फिल्म एक था टाइगर, जिसमें सलमान खान खुफिया रॉ एजेंट बने हुए थे, लेकिन रियल लाइफ के असली टाइगर की लाइफ स्टाइल इसके बिल्कुल विपरीत है।

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नजीबाबाद में रहने वाले असली टाइगर मनोज रंजन दीक्षित आज भी जिंदा हैं, लेकिन दाने-दाने के लिए तरस रहे है। उन्होंने जब डीएम ऑफिस में दिवस अधिकारी के सामने कहा कि वह एक रॉ एजेंट हैं और उन्हें रहने के लिए छत चाहिए तो वह हैरान हो गए। डीएम नहीं मिले इसलिए उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

story of RA&W agent
RA&W agent Manoj Ranjan

मनोज रंजन जासूसी के जूर्म में पाकिस्तान में गिरफ्तार होने के बाद 2005 में बाघा बॉर्डर पर छोड़े गए। पाकिस्तान से छूटने के बाद 2007 में उन्होंने शादी की, लेकिन कुछ दिनों के बाद पता चला कि उनकी पत्नी को कैंसर है। कुछ साल पहले अपनी पत्नी क इलाज करने के लिए लखनऊ आए थे, लेकिन 2013 में उनकी पत्नी की मौत हो गई।

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स्टोर कीपर काम करते थे

मनोज गोमतीनगर विस्तार में स्टोर कीपर का काम कर रहे थे, जो लॉकडाउन के कारण उनके हाथ से निकल गई। तब से बदकिस्मती ने उनको घेर लिया है। पाकिस्तान में यूनुस, यूसुफ और इमरान बनकर रहे। अफगानिस्तान बॉर्डर पर गरफ्तार होने के बाद कई बार टॉर्चर किया गया लेकिन उन्होंने देश के साथ गद्दारी नहीं की।

पॉलिटिकल अपॉइंटमेंट के दौरान बने रॉ एजेंट

80 के दशक में रॉ में पॉलिटिकल अपॉइंमेंट शुरु हो गया था। इस दौरान सरकारी सेवाओं की तरह सामान्य नागरिकों की योग्यता देखकर भर्ती किया गया। वर्ष 1985 के दौर में मनोज रंजन दीक्षित को नजीबाबाद से चुना गया। दो बार सैन्य ट्रेनिंग के बाद कश्मीरियों के साथ उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया।

वहां से वह लगातार सूचनाएं देते रहे लेकिन जनवरी 1982 ने पाकिस्तान ने उन्हें पकड़ लिया। उन्हें कराची के जेल ले जाया गया। देश के लिए कुर्बानी देने वाले मनोज अब 56 साल के हो चुके हैं। उनकी जीवन आगे कैसे बीतेगा यह तो भगवान ही मालिक है। कलेक्ट्रेट के ऑफिस पहुंचे थे कि पीएम आवास या कोई सरकारी मदद मिल जाए लेकिन उन्हें वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा।

कई महत्वपूर्ण जानकारियां देश को बताई

मनोज रंजन ने कश्मीरी युवाओं को बरगलाकर अफगानिस्तान पर ट्रेनिंग दिए जाने की खुफिया जानकारियां देश तक पहुंचाई। खुफिया एजेंसी की पहली शर्त होती है कि पकड़े जाने पर उनको पहचाना नहीं जाएगा। मनोज रंजन ने भी इस कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया था। भारत लौटने के बाद दो बार सवा लाख की मदद रॉ एजेंसी ने की थी, लेकिन बाद में उन्होंने भी हाथ खींच लिया।

 

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