Friday, October 15, 2021

राज्यसभा में भारी विरोध के बाद केजरीवाल के अरमानों पर फिरा पानी, पास हुआ GNCTD बिल

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 15 मार्च 2021 को संसद में एक संशोधन बिल पेश किया. यह बिल देश की राजधानी दिल्ली में एलजी और चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्रों को स्पष्ट करता है. विपक्ष के भारी विरोध के बाद यह बिल राज्यसभा से पास हो गया है. इसका विरोध राज्यसभा में 12 और लोकसभा में कम से कम 9 पार्टियों ने किया.

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राज्यसभा में बुधवार 24 मार्च को इस पर बहस हुई. सदन में हंगामा इतना बढ़ गया कि दो बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. इतना ही नहीं विपक्षी दलों ने तानाशाही बंद करो के नारे लगाए. अंत में विपक्षी दलों ने कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया. जिसके बाद बिल को पास घोषित कर दिया गया.

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ( संशोधन) बिल 2021 यानी GNCTD Act 2021 सोमवार को लोकसभा से पास हो गया था. राष्ट्रपति के दस्तख़त होने के बाद यह बिल कानून बन जाएगा. इसे लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगा रही है कि इस बिल के जरिए केंद्र सरकार दिल्ली में बैकडोर से सरकार चलाना चाहती है. आम आदमी पार्टी का कहना कि केंद्र चुनी हुई सरकार के अधिकारों को खत्म कर रही है. पार्टी ने इसे काला कानून कहा है.

राज्यसभा में बिल पर बहस के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने इसे संविधान का चीरहरण बताया है. उन्होंने कहा कि भरी सभा में कभी द्रौपदी का चीरहरण हुआ था आज संविधान का चीरहरण हो रहा है. आखिर दिल्ली सरकार का दोष क्या है जो सरकार इस तरह के कदम उठा रही है. 1998 से बीजेपी दिल्ली के हर चुनाव से पहले उसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात कहती है. लेकिन वह अब इस तरह के बिल ला रही है. यह बिल संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है. इसे वापस लिया जाना चाहिए.

राज्यसभा में बहस के दौरान सभी विपक्षी दल एक साथ दिखाई दिए. कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस बिल के जरिए केंद्र सरकार चुने हुई प्रतिनिधियों के अधिकारों को छिन रही है और उन्हें उपराज्यपाल (एलजी) को दे रही है. मोदी एलजी को ही सरकार बना रहे हैं. खड़गे ने सवाल करते हुए कहा कि अगर ऐसा है तो चुने हुए प्रतिनिधियों की क्या आवश्यकता है?

TMC की ओर से डेरेक ओ. ब्रायन ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह संविधान की धज्जियां उड़ा रही है. उन्होंने कहा कि यह बेहद अहम था. इसलिए वह बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार से समय निकालकर इसका विरोध करने के लिए सदन में आए हैं. साथ ही ब्रायन ने AIADMK, TRS, बीजू जनता दल जैसी पॉलिटिकल पार्टियों से इस बिल का विरोध करने की अपील की है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के नेताओं को भी इस बिल के विरोध में आना चाहिए, क्योंकि यह किसी पॉलिटिकल पार्टी की लड़ाई नहीं है बल्कि संविधान बचाने की लड़ाई है.

इसे लेकर RJD के मनोज झा ने कहा कि जो पार्टियां यह सोच रही हैं कि ये तो दिल्ली का मामला है, उनसे नहीं जुड़ा है तो वह गलत हैं. कल उनका नंबर आएगा. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के वीपी निषाद. अकाली दल के नरेश गुजरात और राज्यसभा की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस बिल को चुनी हुई सरकार की शक्तियों को कम करने वाला बताया.

क्या है बिल में?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ( संशोधन) बिल 2021 में एलजी को ज्यादा शक्तियां दी गई हैं. संशोधन बिल के अनुसार GNCTD ACT 1991 के सेक्शन 21 में बदलाव किया जाएगा और विधानसभा में बने किसी कानून में सरकार यानी लेफ्टिनेंट गवर्नर होगा यह जोड़ा जाएगा. यानी विधानसभा में पास होने वाले बिलों कि फाइल लेफ्टिनेंट गवर्नर को भेजनी जरूरी होगा.

इस बिल में विधानसभा में रोजमर्रा की चीजों पर बनी कमेटियों के अधिकारों को खत्म करने की बात की गई है. जैसे दिल्ली दंगों , प्रदूषण आदि पर बनी कमेटियां, जो प्रशासनिक फैसलों की जांच कर सकती थीं. इस बिल में उनको पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा. अगर इस बिल को मंजूरी मिल जाती है तो यह प्रावधान पहले से चल रही कमेटियों पर भी लागू होगा.

यह भी पढ़ें- बीजेपी नेता दिलीप घोष ने की ममता बनर्जी पर अभद्र टिप्पणी

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