Saturday, October 16, 2021

भारतीय सेना ने PLA को दिखाया गलवान मॉडल की झलक, अब आंख दिखाने से पहले कई बार सोचेगा चीन

पूर्वी लद्दाख में नौ महीने से भारत और चीन की सेना आमने-सामने थी. इतने लम्बे समय तक आमने-सामने के रहने के बाद बुधवार से भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवान बख्तरबंद वाहनों के साथ के पैंगोंग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से वापस होने लगे हैं।

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इसके पीछे का कारण वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाने की ओर एक और कदम बढ़ाना है। इसके बारे में देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि पैंगोंग लेक क्षेत्र में चीन के साथ सेनाओं को पीछे हटाने का जो समझौता हुआ है उसके मुताबिक दोनों पक्ष चरणबद्ध, समन्वय और सत्यापन के तरीके हटेंगे।

पीएम मोदी को पूरा यकीन था कि पूर्वी लद्दाख की भीषण ठंड में देश के जवान डटे रहेंगे और अंत में वही हुआ। पैंगोग के किनारे से चीनी सेना को खदेड़े जाने पीछे गलवान मॉडल की झलक दिखाई दे रही है। पैंगोंग सो लेक के दोनों किनारे से हो रहे डिस-एंगेजमेंट की प्रक्रिया विदेश मंत्री एस जयशंकर औऱ पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश पर काम करने वाले एनएसए अजीत डोभाल के पर्दे के पीछे की गई कई दौर की बातचीत का नतीजा है।

वहीं, जमीनी स्तर पर कोर्प्स कमांडर स्तर के अधिकारियों ने महीनों तक चीन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें की। सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि इस डिस-एंगेजमेंट में दोनों देशों की सेनाएं ठीक उसी जगह चली जाएं, जहां पर अप्रैल 2020 में थीं। इसका मतलब यह है कि चीनी सेना को जीश्राप सेक्टर से हटना पड़ेगा। यह इलाका पैंगोंग सो लेक उत्तरी किनारे के फिंगर 8 के पूर्व में पड़ता है।

भारतीय सेना भी 1962 के बाद परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले महान सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा के नाम पर बने फिंगर 3 के स्थायी बेस पर वापस चली आएगी। यही नियम पैंगोग के दक्षिणी किनारे पर भी लागू होगा, जहां भारतीय सेना अपने स्थायी बेस चुशुल और चीनी सेना अपने स्थायी बेस मोल्डो पर वापस आ जाएगी। इस पूरे मामले को जानने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों किनारों पर गलवान मॉडल अपनाया गया है।

15 जून को पीएलए और भारतीय सेना के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प के बाद दोनों देशों के सैनिक अपने स्थायी बेस पर वापस चले आए थे। इसके अलावा दोनों पक्षों के पैट्रोलिंग प्रोटोकॉल बनने तक पैट्रोलिंग न करने की सहमति बनी थी। एक बार जब वापसी पूरी हो जएगी , तब दोनों देशों की सेनाएं आपसी समझ से पैट्रोलिंग किए जाने पर फैसला करेंगी।

एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि जब पैंगोंग सो लेक से दोनों देशों के आर्टिलरी, जवानों और बख्तबंद गाड़ियां पूरी तरह से वापस चले जाएंगे, तब दोनों पक्ष पैंगोंग सो के उत्तरी पैट्रोलिंग प्वाइंट 15 ( गोगरा) और 17 (हॉट स्प्रिंग्स) इलाके से डिस-एंगेजमेंट पर बातचीट करेंगे। इस दौरान, भारतीय सेना ने चीनी राष्ट्रपति को पूर्वी लद्दाख में -40 डिग्री तक जाने वाले तापमान में डटे रहना भी दिखा दिया। वहीं, फिंगर 4 से चीनी सेना को श्रीजाप सेक्टर तक वापस भेजना मोदी सरकार के लिए बड़ी जीत है।

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