Saturday, October 16, 2021

जग्गी वासुदेव ने कहा- आप 87 प्रतिशत हिंदुओं में से 25 लोगों को नहीं ढूंढ सकते

चेन्नई। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने 13 मार्च को इंडिया टूडे कॉन्क्लेव साउथ 2021 में अपने विचार रखे. सद्गुरु गैर-लाभकारी आध्यात्मिक संगठन ईशा फाउंडेशन के संस्थापक हैं. उन्होंने वन नेशन, वन इलेक्शन और मंदिरों के हालात पर बात की.

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दरअसल, सद्गुरु जग्गी वासुदेव साउथ इंडियन मंदिरों को बचाने के लिए एक अभियान चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि कैसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने मंदिरों को खोखला कर दिया. पुजारियों को मंदिरों का मालिक क्यों बना दिया? और कैसे मंदिरों पर सरकार पकड़ मजबूत हुई?

कॉन्क्लेव में सद्गुरु ने कहा, मैं रोज मंदिर जाने वाला इंसान नहीं हूं. मैं साल या दो साल में मंदिर जाता हूं. यदि मुझे लगता है कि कोई मंदिर शक्तिशाली है, या बहुत सुंदर है या उसके आर्किटेक्चर में कोई खास बात है तो मैं वहां जाता हूं. जब मुझे एहसास होता है कि मंदिर ऊर्जा से भरा हुआ है तो मैं वहां जाता हूं. मैने अपने जीवन में कभी प्रार्थना नहीं की है. योग की संस्कृति बाहर से मदद लेना नहीं सिखाती है बल्कि खुद जीवन जीने की कला सिखाती है.

मंदिर सिर्फ पूजा के लिए नहीं है: सद्गुरु

जग्गी वासुदेव ने आगे कहा, भारतीय मंदिर सिर्फ पूजा के लिए नहीं हैं. वे स्थापत्य और संस्कृति के लिहाज से भी अद्भुत हैं. मैने अपनी बाइक पर भारत की खूब यात्रा की है. जब आप तमिलनाडु जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि वहां पर मंदिर का एक बेहद अलग स्थान है. यहां पर मंदिर शहरों की धड़कन है. मंदिर की वजह से वहां शहर बसता है न कि लोगों की वजह से. इसलिए मंदिर बनाए गए हैं. मंदिर बनने के बाद ही इस शहर को पहचान मिली है.

यूनेस्कों ने मंदिरों की दुर्गति को लेकर चिंता जता चुका है

उन्होंने कहा, यूनेस्कों ने तमिलनाडु के मंदिरों के हालात को लेकर चिंता जताई थी. तमिलनाडु सरकार ने जुलाई 2020 में मद्रास कोर्ट को बताया था कि 11,999 ऐसे मंदिर हैं, जो वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं. जिसके कारण वहां पर पूजा नहीं हो पा रही है. साथ ही 34 हजार ऐसे मंदिर थे, जिनकी सालभर की आय 10 हजार से भी कम थी. इसके अलावा 37 हजार ऐसे मंदिर थे जहां पर पूजा, केयरटेकिंग, सिक्योरिटी और क्लीनिंग की जिम्मेदारी सिर्फ एक आदमी पर है.

गुरुद्वारों के प्रंबधन की मिसाल दी

सद्गुरु ने गुरुद्वारों के प्रंबधन की तारीफ करते हुए कहा कि SGPC (गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी) लगभग 85 गुरुद्वारों का संचालन करती हैं. उनका सालाना बजट 1000 करोड़ रुपए का होता है. अपने समुदाय के प्रति जनसेवा काबिले तारीफ है. वहीं दूसरी ओर 44 हजार मंदिरों की सालाना आय सिर्फ 128 करोड़ है.

उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि तमिलनाडु में हिंदुओं का आबादी 87 प्रतिशत है. ऐसे में आप 25 लोगों को नहीं ढूंढ सकते हैं. जो मंदिर प्रबंधन के लिए बोर्ड का गठन कर सकें?

सदगुरु ने पीएम मोदी के वन नेशन, वन इलेक्शन की तारीफ की. उन्होंने कहा कि वह बेहद खुश हैं कि पीएम मोदी ने इस तरह का कदम उठाया है. संसदीय चुनावों के साथ राज्यों के चुनाव भी हो जाने चाहिए. इसके अलावा उन्होंने इलेक्शन कमीशन को और शक्ति देने की वकालत की है.

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं पर सरकार ने कसा शिकंजा, शरणार्थी बोले- हम भारत में रहना चाहते हैं

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