Saturday, October 16, 2021

पाकिस्तान के निशाने पर अजीत डोभाल, जैश के आतंकी ने बताया खूंखार ‘पाकिस्तानी प्लान’

आंतक को पनाह देने वाले पाकिस्तान की साजिशों का एक बार फिर से पर्दाफाश हो गया है। बीते दिन गिरफ्तार हुए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि कैसे पाकिस्तान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकरा अजीत डोभाल पर गिद्ध की तरह नजर रखे हुए है। इसके लिए पाकिस्तान ने NSA के ऑफिस पर जासूसी भी कराई।

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आतंकी ने बताया कि उसने पाकिस्तान स्थित हैंडलर के निर्देश पर राजधानी में सरदार पटेल भवन और अन्य अहम ठिकानों की जासूसी की है। इस खुलासे के बाद अजीत डोभाल के दफ्तर और घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और इस मामले से जुड़े लोगों को इसकी जानकारी दे दी गई है।

2016 सेअजीत डोभाल पर पाकिस्तान की नजर

अजीत डोभाल भारत के सबसे प्रोटेक्टेड शख्सियत में से एक है। 2016 की उरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान से संचालित होने वाले आतंकी संगठन अजीत डोभाल को निशाना बना रहे हैं। पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि कि अजीत डोभाल को संभावित खतरे से सुरक्षा एजेंसियों और गृह मंत्रालय को बता दिया गया है।

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सुरक्षा विस्तार का बनाया वीडियो

दिल्ली और श्रीनगर के अधिकारियों ने बताया कि जैश के आतंकी हिदायत-उल्लाह मलिक से पूछताछ करने पर अजीत डोभाल पर नजर रखने वाली वीडियो की जानकारी सामने आई। उसने बताया कि वह 24 मई 2019 को इंडिगो की फ्लाइट से श्रीनगर से नई दिल्ली आया था। उसने NSA ऑफिस समेत केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सुरक्षा विस्तार का एक जासूसी वीडियो बनाया। उनसे जासूसी के बाद रिकॉर्ड किए गए वीडियो को WhatsApp के जरिए पाकिस्तान में स्थित हैंडलर को भेजा। हैंडलर को उसने डॉक्टर के रूप में बताया है।

सांबा सेक्टर के सीमा क्षेत्र में की थी रेकी

दिल्ली में जासूसी करने और वीडियो भेजने के बाद मलिक बस में बैठकर श्रीनगर वापस लौट गया। उसने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने समीर अहमद डार के साथ 2019 में गर्मी के समय सांबा सेक्टर के सीमा क्षेत्र में रेकी की थी। अहमद डार वही शख्स है जिसे 21 जनवरी 2020 को पुलवामा आतंकी अटैक के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

आत्मघाती हमले के लिए कार ली थी

मिली जानकारी के मुताबिक, मलिक ने मई 2020 में एक आत्मघाती हमले के लिए हुंडई सैंट्रो कार ली थी और उसने काबूला है कि उसने और तीन अन्य जैश आतंकियों- इरफान ठोकर, मुश्ताक और रईस मुस्तफा शोपियां में नवंबर 2020 में जम्मू-कश्मीर के कैश वैन से 60 लाख रुपए लूटे थे।

हैंडलर के नाम का हुआ खुलासा

जैश आतंकी ने हैंडलर सहित पाकिस्तान में अपने 10 संपर्को के नामों, कोड नामों और फोन नंबर का भी खुलासा किया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को दे दी है। जानकारी के मिलने के बाद उसके दो कॉन्टैक्ट शोपियां और सोपोर में मारे गए।

कई साल से था जैश के संपर्क में

मलिक ने अधिकारियों को अपने बैकग्राउंड के बारे में विस्तार बताते हुए कहा, 31 जुलाई 2019 को वह हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। जैश में आने से पहले फरवरी 2020 में जैश के लिए औवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम किया और फिर उसी साल एक अलग आतंकी ग्रुप खड़ा किया।

अजीत डोभाल और जैश प्रमुख पुराने दुश्मन

NSA अजीत डोभाल और जैश प्रमुख मसूद अजहर की पुरानी दुश्मनी है। 1994 में भारत में अजहर की गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो के संयुक्त डायरेक्ट  के रूप में अजीत डोभाल ने पूछताछ की थी और 1999 में विमान हाईजैक होने के बाद कंधार एयरपोर्ट पर भी पहुंचाया था।

बता दें, शोपियां में रहने वाले जैश ऑपरेटर मलिक को 6 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ जम्मू-कश्मीर पुलिस स्टेशन में धारा 18 और 20 यूपीए के तहत केस दर्ज किया गया है। मलिक जैश फ्रंट समूह और लश्कर-ए-मुस्तफा का प्रमुख है। उसे अनंतनाग में गिरफ्तार किया गया था और उसके पास से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए थे।

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