Saturday, October 16, 2021

Medical Termination of Pregnancy bill:नया एबॉर्शन कानून चाइल्ड टर्मिनेशन को लीगल कर देगा?

नई दिल्ली। लोकसभा में 17 मार्च 2020 को Medical Termination of Pregnancy (amendment) bill 2020 (MTP) पास हुआ था. इसके ठीक एक साल बाद यह बिल राज्यसभा से भी पारित हो गया. यानी संसद ने एबॉर्शन कानून में बदलाव की मंजूरी दे दी.

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इस नए MTP बिल के मुताबिक डॉक्टर की सलाह पर महिलाएं 20 हफ्ते के गर्भ को अबॉर्ट करा सकती हैं. वहीं medical termination of pregnancy act 1971 के अनुसार विशेष कैटेगरी की महिलाओं को दो डॉक्टर्स की सलाह पर 20 हफ्ते के गर्भ को अबॉर्ट करने की इजाज़त थी लेकिन अब उसे बढ़ाकर 24 हफ़्ते कर दिया गया है.

इससे पहले 24 हफ़्ते से ज्यादा गर्भ होने पर एबॉर्शन की अनुमति नहीं थी. लेकिन अब इस नए बिल के मुताबिक मेडिकल बोर्ड की रजामंदी से ऐसा किया जा सकेगा. संसद में इस बिल के पास होते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि यह नया बिल महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करेगा.

चलिए जानते हैं कि इस नए बिल के कानून बनने से क्या बदल जाएगा? आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इसपर एक्सपर्ट की क्या राय है? और यह महिलाओं की प्राइवेसी से किस तरह से सम्बन्धित है?

महिलाओं की प्राइवेसी के बारे में क्या कहता है यह कानून

इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य यह है कि खास परिस्थितियों और प्रेगनेंसी में किसी समस्या की वजह से एबॉर्शन कराना पड़ जाए तो महिलाएं आसानी से एबॉर्शन करा सकें. लेकिन इसमें महिलाओं की प्राइवेसी की भी बात कही गई. इसके साथ सरकार ने अविवाहित महिलाओं को एबॉर्शन की इजाज़त दे दी है. नहीं तो अभी तक असुरक्षित तरीके से एबॉर्शन किया जा रहा था जिसकी वजह से महिलाओं की जिंदगी खतरे में पड़ जाती थी. इस नए एबॉर्शन कानून में महिलाओं के स्वास्थ्य को सर्वोपरि माना गया है. इसमें डॉक्टर्स की राय अहम भूमिका निभाएगी.

इसके अलावा MTP बिल में महिलाओं की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए 18 से अधिक उम्र की महिलाओं को बिना माता-पिता या गार्जियन या पार्टनर को बताए एबॉर्शन की मंजूरी दे दी है. लेकिन नाबालिक के मामले में एबॉर्शन के समय माता-पिता या गार्जियन का होना अनिवार्य है.

यदि गर्भ 20 हफ्ते से अधिक है तो?

Medical Termination of Pregnancy (amendment) bill 2020 के तहत महिलाएं 20 हफ़्ते के गर्भ को टर्मिनेट करा सकती हैं. वहीं विशेष कैटिगरी वाली महिलाओं के लिए एबॉर्शन की समय सीमा 20 से बढ़ाकर 24 हफ़्ते कर दी गई है. यानी विशेष परिस्थितियों में महिलाएं 24 हफ्ते के गर्भ को टर्मिनेट करा सकती हैं. लेकिन इसके लिए शर्त है-

1. महिला के जीवन को खतरा हो.
2. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गहरा आघात लगने का डर हो.
3. जन्म लेने वाले बच्चे को शारीरिक और मानसिक विकलांगता का डर हो.
4. अनचाहा गर्भ, जिससे बचने के लिए पार्टनर और महिला ने सभी तरह के उपायों को आजमाया हो लेकिन वह फेल हो गया हो.

कानून पर क्या है विवाद?

Indian penal code यानी भारतीय दंड संहिता 1860 के अनुसार अपनी मर्जी से एबॉर्शन कराना कानूनन अपराध है. कुछ शर्तों पर Medical termination of pregnancy act 1971 डॉक्टर्स से एबॉर्शन की मंजूरी देता है. पर इस नए बिल में कहा गया है कि एबॉर्शन सिर्फ gynecology या obstetrics विशेषज्ञता वाले डॉक्टर्स ही कर सकते हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन डॉक्टरों की 75% कमी है. ऐसे में ग्रामीण महिलाएं सुरक्षित गर्भपात के लिए स्वास्थ्य केंद्रों तक कैसे पहुंचेंगी.

MTP बिल में यह साफ नहीं किया गया है कि विशेष कैटेगरी में किन महिलाओं को शामिल किया जाएगा. लेकिन इसमें रेप विक्टिम, दिव्यांग महिलाएं और नाबालिग को जरूर शामिल किया जाएगा. वहीं, कई मामले ऐसे आते हैं जिसमें महिलाएं शरीर में होने वाले बदलावों को नही समझ पाती हैं और डर, शर्म या दोषी होने की वजह से गार्जियन को बताने में कतराती हैं. वैसे इस नए कानून में 20 से 24 हफ्ते के बीच एबॉर्शन के लिए दो रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की मंजूरी अनिवार्य होगी.

एबॉर्शन को लेकर अन्य देश में क्या नियम हैं?

अमेरिका में एबॉर्शन को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम-कानून हैं. 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एबॉर्शन को लीगल कर दिया था. लेकिन अलबामा जैसे कुछ राज्यों में विशेष परिस्थितियों में छोड़कर एबॉर्शन गैर-कानूनी है.

वहीं, यूनाइटेड किंगडम में महिला के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान होने से रोकने के लिए या फिर बच्चे को गंभीर रूप से विकलांग होने का खतरा है तो एबॉर्शन कराया जा सकता है.

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं के अनुरोध पर 12 हफ़्ते तक गर्भ को टर्मिनेट कराने की इजाज़त है. एबॉर्शन को 20 हफ्ते के बाद किया जा सकता है बशर्ते महिला या भ्रूण की जान को खतरा हो या फिर भ्रूण के असामान्य होने का खतरा हो.

यह भी पढ़ें- भारत-पाकिस्तान शांतिवार्ता पर क्या कहते हैं डिफेंस एक्सपर्ट

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