Saturday, October 16, 2021

अब 18 साल से अधिक उम्र वालों को लगेगी वैक्सीन लेकिन कैसे?

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश में कोहराम मचा रखा है. भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. यहां तक कोरोना से रोज होने वाली मौतों के मामले में भारत टॉप पर आ गया है. ब्राजील दूसरे नंबर और अमेरिका तीसरे नंबर पर है.

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कोरोना महामारी के प्रकोप को देखते हुए लोगों ने देश के सभी 18+ को वैक्सीनेट करने की मांग की. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह मुद्दा उठाया था, जिसका समर्थन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी किया था. वहीं, कांग्रेस ने इसे लेकर अभियान चला दिया. आखिर सोमवार को केंद्र सरकार ने फैसला ले लिया कि 1 मई यानी श्रम दिवस से 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीनेट किया जाएगा.

सरकार ने वैक्सीन लगाने का फैसला ले लिया है लेकिन इसमें कुछ अचड़ने भी आएंगी. चलिए समझते हैं इस मामले को….

Coronavirus Vaccine
सांकेतिक तस्वीर
सरकार आदेशानुसार कब और कहां पर मिलेगी वैक्सीन?

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में जो तबाही मचा रखी है, उसको देखते हुए केंद्र सरकार के ऊपर सभी तरफ से दबाव था कि वह 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीनेट करने का फैसला ले. यहां तक वकील रश्मि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. जिसमें कहा गया कि कोरोना की दूसरी लहर काफी घातक है. इसलिए 18+ को वैक्सीन लगाई जानी चाहिए. इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और आर सुभाष रेड्डी करने वाले हैं.

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया. इस फैसले के तहत अब सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी से जारी होने वाले 50 प्रतिशत डोज केंद्र सरकार को दिए जाएंगे और बाकि के 50 फीसदी डोज राज्य को और खुले बाजार में मिलेंगे. इसके अलावा 1 मई 2021 से पहले सभी वैक्सीन निर्मातओं को राज्य सरकारों और खुले बाजार में वैक्सीन की कीमत बतानी होगी.

राज्य सरकारें, प्राइवेट अस्पताल और औद्योगिक संगठन वैक्सीन निर्माताओं के 50 प्रतिशत डोज खरीदेंगे. इसके साथ वैक्सीनेशन की कीमत क्या होगी? इसका फैसला प्राइवेट अस्पताल करेंगे. इसके अलावा इस समय जिन केंद्रों में 45 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन हो रहा है, वह जारी रहेगा. सरकारी केंद्रो में फ्री और प्राइवेट केंद्रों में 250 रुपए में डोज लगते रहेंगे.

यह वैक्सीनेशन भी राष्ट्रीय टीकाकरण हिस्सा रहेगा. कोविन प्लेफॉर्म के नियमों का पालन किया जाएगा. साइड इफेक्ट्स की रिपोर्ट और अन्य नियम पहले जैसे रहेंगे. इसके साथ राज्य सरकारों को कोविड वैक्सीन डोज के स्टॉक और कीमत की रियल टाइम जानकारी देनी होगी.

केंद्र सरकार ने WHO की ओर से मंजूर की गई वैक्सीन को आपातकालीन मंजूरी देने का फैसला लिया है. केंद्र सरकार इन वैक्सीनों को नहीं खरीदेगी लेकिन राज्य सरकार और प्राइवेट अस्पताल इसे खरीद सकेंगे. इसका मतलब यह है कि अगर आपको मॉडर्ना या फाइजर के अलावा कोई दूसरी वैक्सीन लगवानी है तो 1 मई के बाद प्राइवेट अस्पताल उसकी इंतजाम कर सकते हैं.

सरकार अपने हिस्से का स्टॉक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में देती रहेगी. एक्टिव कोविड-19 केसेज और परफॉर्मंस ( वैक्सीनेशन स्पीड) इसका आधार बनेगी. वैक्सीन वेस्ट को भी आधार बनाया जाएगा. इसके मुताबिक सभी राज्यों का कोटा तय होगा जिसके अनुसार उन्हें केंद्र सरकार से वैक्सीन मिलती रहेगी.

इसके अलावा जिन हेल्थकेयर, फ्रंटलाइनर और 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है. उनके दूसरे डोज को भी प्राथमिकता दी जाएगी. इन नियमों को स्टेकहोल्डर्स पर लागू किया जाएगा. ये नए नियम 1 मई 2021 से लागू होंगे और समय-समय पर इसका आकलन किया जाएगा.

Coronavirus Vaccine
सांकेतिक तस्वीर
नए नियमों से वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज होगी?

इन नए नियमों से कोविड19 वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ना बेहद मुश्किल है. क्योंकि वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने के लिए हमें अधिक से अधिक डोज चाहिए. जो राज्य सरकारों के पास नहीं है और 1 मई के बाद ऐसा क्या हो जाएगा जो सबको डोज मिल जाएगी? राज्य सरकारों के दबाव में आकर केंद्र सरकार ने यह फैसला तो ले लिया है लेकिन वैक्सीन की डोज उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल होने वाला है.

ऐसे समझिए गणित को यदि 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को 31 जुलाई तक वैक्सीनेट करना है तो हर महीने 13 करोड़ डोज चाहिए और रोजाना 46 लाख डोज लगाने होंगे. यदि इन लोगों को 30 जून तक वैक्सीनेट करना है तो हर महीने 18.5 करोड़ कोविड वैक्सीन की डोज चाहिए और रोज 60 लाख डोज लगाने होंगे.

वहीं, मार्च तक सीरम इंडिया इंस्टीट्यूट (SII) ने कोवीशील्ड के 31.6 करोड़ डोज बनाए. भारत बायोटेक ने 4.6 करोड़ डोज बनाए. SII में हर महीने औसतन प्रोडक्शन 7 करोड़ डोज का है. जबकि बायोटेक में 1.2 करोड़ डोज है. हमें 13.18 करोड़ डोज हर महीने चाहिए. लेकिन मार्च 2021 में 8.2 करोड़ डोज का प्रोडक्शन हुआ है. यानी हर महीने 4.98 करोड़ डोज की कमी है.

हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए भारत सरकार ने रूसी वैक्सीन स्पुतनिक V को 12 अप्रैल को मंजूरी दी थी. साथ ही अन्य विदेशी वैक्सीन को मंजूरी देने की प्रक्रिया तय की गई है. हमारा टारगेट तब पूरा होगा जब 5 करोड़ डोज की कमी पूरी होगी.

covaxin
वैक्सीन को लेकर अभी क्या हालात हैं?

वैक्सीनेशन को 1 अप्रैल के बाद रफ्तार मिली थी. 5 अप्रैल को सबसे ज्यादा 45 लाख डोज दिए गए थे. लेकिन उसके बाद औसतन 30 लाख डोज ही दिए गए. वैक्सीन की किल्लात होने की वजह से यह आंकड़ा गिरता ही जा रहा है. जबकि बढ़ते केसेज को देखते हुए ये आंकड़े बढ़ने चाहिए थे.

वैक्सीनेशन सेंटर पर लोग जा रहे हैं लेकिन वहां पर डोज ही नहीं है. कुछ सेंटरों में राशनिंग शुरु हो गई है. सरकार ने वैक्सीन की किल्लत को दूर करने के लिए 12 अप्रैल को रूसी वक्सीन स्पूतनिक V को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही अन्य विदेशी स्वीकृत वैक्सीन कंपनियों से अपील की है कि वह भारत में वैक्सीन उपलब्ध कराए.

इस समय देश में जितने भी लोगों को वैक्सीन डोज मिली है उनमें सबसे अधिक SII की कोवीशील्ड की हिस्सेदारी रही है, करीब 91 प्रतिशत. SII दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी है लेकिन कच्चे माल की कमी होने के कारण प्रोडक्शन में कमी आ गई है.

वहीं, दूसरी ओर भारत बायोटेक को प्रोडक्शन तेज करने में काफी मुश्किलें आ रही हैं. वैक्सीन की इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने बायोमेडिकल रिसर्च बॉडी हॉफकिन इंस्टीट्यूट को कोवैक्सीन बनाने को कहा है.

बैठक में सरकार के नए फैसले से साफ पता चलता है कि वह सरकारी सेट-अप में सिर्फ 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीनेट करेगी. बाकी लोगों को वैक्सीनेट करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों को दे दी है. यानी राज्य सरकारें तय करेंगी कि 18 साल से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाने का खर्चा कौन उठाएगा?

बता दें, विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. उनका मानना है कि इस तरह से प्राइवेट क्षेत्र भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम से जुड़ जाएंगे और वैक्सीनेशन में रफ्तार आ जाएगी. हालांकि इस समय वैक्सीन की किल्लत है लेकिन स्पुतनिक V के साथ फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन आने के बाद समस्या खत्म हो जाएगी. इसके साथ भारत में 6 वैक्सीन ट्रायल पर हैं. जल्द ही उनके क्लिनिकल ट्रायल के रिजल्ट आ जाएंगे. जिसके बाद वैक्सीन की कम बिल्कुल नहीं होगी.

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फाइजर और मॉडर्न

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