Thursday, August 5, 2021

सोशल मीडिया पर लिखने से पहले दो बार सोचें, क्योंकि सरकार ये नए नियम ला रही है

कई दिनों से सोशल मीडिया और OTT प्लेटफार्म्स ऐप्स को रेगुलेट करने की मांग चल रही थी. सरकार भी इस ओर विचार कर रही थी. इसी सिलसिले से गुरुवार को कुछ बड़ी घोषणाएं हुईं.

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इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद और आईबी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने एक प्रेस कॉनफ्रेंस की. इस कॉन्फ्रेंस में सोशल मीडिया और OTT को लेकर नए नियमों की घोषणा की. इन नियमों को सरकार ने सॉफ्ट टच मैकेनिज्म नाम दिया है. यानी ऐसा मैकेनिज्म जिसे प्लेटफॉर्म खुद बनाए और लागू करे, लेकिन सरकार ने इसके साथ कई सख्त नियम भी जोड़े हैं.

इसके अलावा बड़ी सोशल मीडिया कंपनी को कंटेट की जानकारी देने और शिकायतों को सुलझाने के लिए एक सिस्टम तैयार करने को बोला है. चलिए विस्तार में जानते हैं कि सरकार ने किस प्लेटफार्म के लिए क्या नियम बनाएं हैं.

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सोशल मीडिया

  • सरकार ने बताया है कि भारत में 53 करोड़ वाट्सऐप, 41 करोड़ फेसबुक, 21 करोड़ इंस्टग्राम और 1.75 करोड़ ट्विटर यूजर्स हैं. ऐसे में इतने ज्यादा यूजर्स होने पर प्लेटफार्म के लिए कुछ नियम-कायदे बनाने जरूरी हैं.
  • अगर सोशल मीडिया पर कोई यूजर अपनी हद पार करता है तो प्लेटफार्म को सख्ती दिखानी होगी. खासकर महिलाओं के मामले में. अगर कोई महिला किसी कंटेट के बारे में शिकायत करती है, जिससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो उसे 24 घंटे के अंदर हटाना होगा. उदाहरण के लिए प्राइवेट पार्ट, अतरंग तस्वीरें या फर्जी अकाउंट. इस तरह की शिकायत यूजर या उसकी तरफ से कोई दूसरा व्यक्ति कर सकता है.
  • सरकार ने सोशल मीडिया को दो कैटेगरी बांट दिया है, पहला सोशल मीडिया इंटरमीडिएटरी और दूसरा सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडिएटरी . इन दोनों में बस इतना फर्क है कि जो सोशल मीडिया कंपनी बड़ी है उसे सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडिएटरी में रखा जाएगा बाकी को नॉर्मल कैटेगरी में. सरकार जल्द ही कैटेगरी के हिसाब से यूजर्स की संख्या बताएगी.
  • जितने भी सख्त नियम-कायदे हैं वह सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडिएटरी के लिए हैं. इन सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में एक चीफ कंप्लायंस ऑफिसर, नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर रखना जरूरी है. ये सुनिश्चित करेंगे कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं.
  • नोडल कॉन्टैक्ट सरकारी एजेंसियों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहना पड़ेगा.
  • किसी भी कंप्लायंस पर यूजर्स को 24 घंटे में जानकारी देनी होगी. 15 दिन के अंदर उस पर एक्शन लेकर यूजर को बताना होगा.
  • सोशल मीडिया को हर महीने ग्रीवांस रिपोर्ट देनी होगी. इसमें बताना होगा कि उनके पास किस तरह की शिकायतें आई हैं और उन्होंने क्या एक्शन लिया है.
  • भारत में सोशल मीडिया कंपनी को एक फिजिकल एड्रेस बनाना होगा और उसे अपनी वेबसाइट व ऐप पर दिखाना होगा.
  • अगर कोई सोशल मीडिया कंपनी किसी यूजर के कंटेंट को खुद ब खुद हटाती है तो उसे यूजर को अपनी बात रखने का मौका देना होगा और कंटेंट हटाने से पहले उसका कारण बताना होगा.
  • यदि सोशल मीडिया को कोर्ट और सरकारी एजेंसी कोई जानकारी होस्ट या पब्लिश करने से मना करती है तो उसे वह मानना होगा. इसमें देश की एकता-अखंडता को खतरे में डालने वाली, कानून-व्यवस्था को भंग करने वाली, दोस्त देशों से रिश्ते खराब करने वाली जानकारी शामिल है.
  • सोशल मीडिया को किसी पोस्ट के फर्स्ट ओरिजिनेटर की जानकारी सरकार को देनी होगी. मतलब सरकार सोशल मीडिया से पूछ सकती है कि सबसे पहले किसने और कहां से पोस्ट या मैसेज को शेयर किया था. हालांकि सरकार यह जानकारी तब मांगेगी जब मामला कानून व्यवस्था और देश की अखंडता से जुड़ा होगा. ऐसे में सरकार ने 5 साल की सजा का प्रावधान किया है. सरकार का कहना है कि इससे आपराधिक गतिविधियां कम होगी.
  • गजट में प्रकाशित होने के बाद यह नियम-कानून लागू हो जाएंगे. हालंकि गजट में नियम छपने के बाद सोशल मीडिया को 3 महीने का वक्त दिया जाएगा. ये वह कंपनियां हैं जिन्हें ज्यादा एहतियात बरतना है और अधिकारियों की नियुक्ति करनी है.

OTT

  • इन्फॉर्मेशन एंड ब्राॉडकास्टिंग मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि उनके पास 40 OTT प्लेटफॉर्म की जानकारी है. उन्होंने सभी प्लेटफॉर्म से तीन बार बात की. जब कोई सेल्फ रेग्युलेटिंग मैकेनिज्म नहीं बन पाया तो नए नियम लाने का फैसला किया गया.
  • OTT प्लेटफॉर्म को टीवी और अखबार की तरह एक सेल्फ रेगुलेटिंग बॉडी बनानी होगी. इसका हेड सुप्रीम कोर्ट का रिटायर्ड जज और कोई नामी व्यक्ति होगा.
  • OTT पर दिखाए जाने वाले सीरियल के लिए वही गाइडलाइन लागू होगी, जो टीवी के लिए होती.
  • सरकार ने मूवीज में किसी भी तरह के सेंसर की बात नहीं की है. इन्हें व्यूअर्स की उम्र के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी में रखना होगा. उदाहरण के तौर पर 13+, 16+ और Adult आदि.
  • OTT प्लेटफॉर्म को पैरेंटल कंटेंट कंट्रोल की सुविधा देनी होगी. इससे लोग तय कर सकेंगे कि उनके घर में किसी खास तरह के कंटेट को बच्चे न देख पाएं.

डिजिटल न्यूज मीडिया

  • प्रकाश जावड़ेकर ने कबूल किया है कि उन्हें खुद नहीं पता कि देश में कितने न्यूज पोर्टल हैं जो ऑनलाइन चल रहे हैं. ऐसे में सबसे जरूरी बात यह है कि इसकी जानकारी एकत्र की जाए.
  • ऐसे में डिजिटल न्यूज मीडिया को अपनी विस्तृत जानकारी देनी होगी. टीवी और अखबार की तरह रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा.
  • डिजिटल न्यूज मीडिया को बताना होगा कि उसका मालिक कौन है और उसने इसमें कितने पैसे लगाए हैं.
  • टीवी और अखबार के जैसे डिजिटल न्यूज मीडिया में भी ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम लागू करना होगा. यानी शिकायतों पर कार्रवाई के करने के लिए सिस्टम लागू करना होगा.अगर गलती होती है तो खुद से रेगुलेट करना होगा. जैसे टीवी और अखबार में भूल सुधारने और पेनाल्टी का प्रावधान है ठीक वैसे ही डिजिटल मीडिया के लिए किया गया है.
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