Friday, October 15, 2021

लखनऊ: आठ दिवसीय श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का सजीव प्रसारण का शुभारंभ

लखनऊविद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश ने सरस्वती कुंज निरालानगर स्थित प्रो. रज्जू भैया डिजिटल सूचना संवाद केंद्र से गुरुवार को प्रात: 10.15 बजे से आठ दिवसीय श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का सजीव प्रसारण प्रारंभ किया। आठ दिवसीय श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की शुरुआत अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री इतिहास संकलन योजना माननीय संजय जी ने हवन-पूजन के बाद की। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में माननीय संजय जी ने कहा कि जगत जननी मां भगवाती के अनेक रूप हैं, और नवरात्रि महापर्व में मां भगवती के सभी रूपों के निरंतर साधना की जाती है। मां भगवती की निरंतर सेवा भक्ति करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। साथ ही श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का नवरात्रि में पाठ बड़ा फलदायी होता है जिसके महत्त्व को लेकर समाज को जागरूक किया जाना चाहिए।

सभी कष्टों का निवारण करती हैं मां भगवती

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माननीय संजय जी ने आगे कहा कि संसार की उत्पत्ति मां भगवती के द्वारा की गई, इसलिए उन्हें जगत जननी कहा जाता है और सभी जीव उनकी संतान हैं। जब हम मां की स्तुति करते हैं तो हमें सभी कष्टों और संकट से हमारी रक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में मां को परमात्मा और संतान को आत्मा का रूप माना गया है और आत्मा सदैव स्तुति के माध्यम से परमात्मा से जुड़ने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को मां भगवती का स्वरूप माना गया है। वह भिन्न-भिन्न अवस्थाओं में हमारी सहायता और रक्षा करती हैं। इन्हें मां के रूप माने गए हैं। जब हम उसे सच्चे मन से पुकारेंगे तो वह किसी न किसी रूप में हमें दिखेंगी।

मां भगवती ने नौ दिन तक किया युद्ध

क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्र जी ने आठ दिवसीय श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करने नई उर्जा का संचार होता है। मनुष्य के जीवन में आने वाले संकटों से मां रक्षा करती है। मां दुर्गा की आराधना प्रचीन काल से होती आ रही है। उन्होंने बताया कि सतयुग में मां भगवती ने देवताओं की रक्षा करने के लिए महिषासुर से नौ दिन तक युद्ध किया था। इस वजह से देवताओं ने उनके नौ दिन के नौ रूपों की आराधना करना शुरू ​की। वही द्वापर युग में मान्यता है कि इसी दिन पांडवों का देवलोक गमन हुआ था।

सदियों पुरानी है मां भगवती की पूजा का विधान

त्रेता युग में भगवान राम ने रावण का वध करने के लिए आज के ही दिन मां भगवती की पूजा विधि विधान से की थी और नौ दिन तक मां दुर्गा युद्व में उनकी सहायता करती रही। कलयुग में नवरात्रि पर मां दुर्गा जी की आराधना करने से विभिन्न कष्टों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। कार्यक्रम के अंत में आए हुए अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापन बालिका शिक्षा प्रमुख श्री उमाशंकर मिश्र जी ने किया।

कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख श्री सौरभ मिश्रा जी ने किया। इस कार्यक्रम में सेवा कार्य प्रमुख श्री रजनीश पाठक जी, सुश्री शुभम सिंह, श्री अतहर रजा, श्री अभिषेक जी सहित विद्या भारती के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।

सह प्रचार प्रमुख – भास्कर दुबे, विद्या भारती, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मो. नंबर: 99554322000

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