Wednesday, August 4, 2021

शादी का वादा करके किया गया सेक्स रेप माना जाएगा? जानिए इस सवाल पर कोर्ट ने क्या कहा

उड़ीसा। एक लड़का-लड़की की दोस्ती होती है. फिर प्यार होता है. लड़का उससे शादी का वादा करता है और लड़की के साथ शारिरिक संबंध बनाता है. लड़की यह सोचकर हामी भर देती है कि शादी तो होनी है. दोनों फिर सेक्सुअल रिलेशनशिप में आ जाते हैं.

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कुछ दिनों बाद लड़का शादी से मना कर देता है. तरह-तरह के बहाने बनाता है. कुछ मामलों में लड़का लड़की को धमकी भी देता है. फिर लड़की कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है और लड़के पर रेप का आरोप लगाती है. फिर कानूनी लड़ाई शुरू होती है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि जब लड़का लड़की अपनी मर्जी से सेक्सुअल रिलेशनशिप में आते हैं और ऐसी स्थिति बनती है तो उसे रेप कहा जाएगा या नहीं?

ऐसा ही सवाल ओडिशा हाईकोर्ट के सामने उठा. जिसपर कोर्ट ने कहा कि इस तरह के संबंध में महिला अपनी मर्जी से आती है ऐसे में कानून में बलात्कार की परिभाषा में और स्पष्टता की जरूरत है.

हाईकोर्ट के जज एसके पाणिग्रही ने आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि सेक्सुअल रिलेशनशिप के मामले में रेप से जुड़ा कानून नहीं लगना चाहिए. खासतौर पर तब जब लड़की की मंजूरी शामिल हो. ऐसे में आरोपी को सजा के लिए कानून में स्पष्टता का अभाव है.

बता दें, पिछले साल पुलिस ने एक लड़की से बलात्कार करने के आरोप में एक शिकायत दर्ज की थी. लडकी ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उससे शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. आरोप है कि इस रिलेशनशिप के दौरान लड़की दो बार प्रेगनेंट हुई. जिसे आरोपी ने दवा देकर अबॉर्ट कर दिया.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल लड़की ने युवक से कहा कि वह उससे शादी कर ले. लेकिन उसने इससे इंकार कर दिया. इसके बाद पिछले साल अप्रैल में युवक ने कथित तौर से लड़की की फेक फेसबुक आईडी बनाई. जिसमें उसने अपने साथ लड़की की निजी तस्वीर शेयर की, जिसमें लिखा था कि यह लड़की चरित्रहीन है. आरोपी युवक ने कथित तौर से लड़की को धमकी दी कि वह उसकी आपत्तिजनक फोटो वायरल कर देगा. इतना ही नहीं उसने लड़की को अगवा करने और जान से मारने की धमकी भी दी थी.

हालांकि, जस्टिस पाणिग्रही ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. लेकिन उन्होंने कहा कि कानून में यह अच्छी तरह से निर्धारित है कि शादी का झूठा वादा करके मिली सहमति वैध सहमति नहीं है. कानून बनाने वालों ने विशेष रूप उन परिस्थितियों का उल्लेख किया है जब आईपीसी की धारा 375 में सहमति का मतलब वैध सहमति नहीं होता है.

ऐसे में शादी का वादा करके सेक्सुअल रिलेशनशिप के लिए सहमति आईपीसी की धारा 375 में नहीं आती है. इसलिए आईपीसी की धारा 375 के अनुसार सहमति को निर्धारित करने के लिए आईपीसी की धारा 90 के प्रावधानों को गंभीर रूप से देखने की जरूरत है. शादी का वादा करके सेक्सुअल रिलेशनशिप रखने की रेप बताने वाला कानून गलत लगता है.

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी शिकायतें समाज और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े और गरीब तबकों की तरफ से आती हैं. अक्सर इन तबकों की महिलाओं से शादी का झूठा वादा करके पुरुष शारीरिक संबंध बनाता है और प्रेगनेंट होने के बाद उन्हें छोड़ देता है. कोर्ट ने भी यह पाया कि बलात्कार कानून उन सामाजिक तौर से पिछड़ी महिलाओं को न्याय नहीं दिला पता है जिनके साथ शादी का झूठा वादा करके शारिरिक संबंध बनाया जाता है.

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