Saturday, October 16, 2021

किसानों की नाराजगी को वोटों में बदलने में सफल रही कांग्रेस, आगामी विधानसभा चुनावों में मिलेगा इसका लाभ?

कांग्रेस ने पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव में अपनी जीत दर्ज की है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस जीत को लेकर काफी उत्साहित है। इस निकाय चुनाव में कृषि कानूनों को लेकर किसानों की नाराजगी सियासी तौर पर पार्टी के लिए काफी फायदेमंद साबित हुई है। इस जीत के बाद कांग्रेस अब दूसरे प्रदेशों में किसानों का भरोसा जीतने में जुट गई है, ताकि खुद को और मजबूत कर सके।

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करीब तीन महीनों से किसान कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में आंदोलन के बीच हुए पंजाब निकाय चुनाव को टेस्ट पेपर के तौर पर देखा जा रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस ने आठ में से छह नगरनिगम पर अपनी जीत का परचम लहराया है, वहीं बठिंडा में 53 साल बाद नगर निगम में जीत दर्ज की है।

बीजेपी के टूटने से हुआ कांग्रेस को फायदा

इसके संबंध में पंजाब में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यदि हम इस समर्थन को आगे बनाए रखने में सफल हुए तो आने वाले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर लेंगे। क्योंकि कृषि कानूनों पर आकाली दल और बीजेपी का गठबंधन टूटने से कांग्रेस को फायदा हुआ है। वहीं, आम आदमी पार्टी का भी असर कम हुआ है।

किसानों की नाराजगी को बदला वोटों में

पंजाब के निकाय चुनाव में किसानों की नाराजगी देखने के बाद दूसरे प्रदेशों में विपक्षी पार्टियों के बीच होड़ तेज होगी। किसानों की इस नाराजगी को वोट बदलने के लिए संगठन का होना बहुत जरूरी है। पंजाब में कांग्रेस इसका फायदा इसलिए उठा पाई क्योंकि उसके पास हर वार्ड और गांव में संगठन है।

किसानों का भरोसा जीतने में लगी कांग्रेस

किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमि उत्तर प्रदेश में है। पंजाब के साथ हरियाणा और राजस्थान में कांग्रेस का संगठन मजबूत है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमजोर है। इसी वजह से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा किसान पंचायतों में शामिल हो रही हैं ताकि वह किसानों का भरोसा जीत सकें। रालोद भी हर साल पंचायत कर किसानों का भरोसा जीतने में जुटी लगी हुई है।

कांग्रेस की जीत ने डाला बीजेपी पर दबाव

पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस जीत ने हरियाणा में भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार का समर्थन कर जीजीपी को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। भाजपा भी इस दबाव को समझ रही है। इसलिए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने जाट लैंड के नाम से जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के नेताओं से चर्चा की है।

आगामी विधानसभा चुनावों में असर की उम्मीद

कांग्रेस का कहना है कि कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज बुलंद करने और किसानों के आंदोलन को समर्थन देने से पार्टी का दायरा बढ़ा है। आगामी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में इसका असर देखने को मिलेगा, लेकिन ऐसे में जिस पार्टी का संगठन मजबूत होगा, वही किसानों की नाराजगी को वोट में बदलने में सफल रहेगा।

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