Thursday, August 5, 2021

मनमोहन से लेकर मोदी सरकार तक कैसे बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? समझें पूरा गणित

बुलेट ट्रेन की स्पीड से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पेट्रोल की कीमतों ने 100 का आंकड़ा पार कर लिया है और उसके पीछे-पीछे डीजल भी बराबरी से चल रहा है। दिल्ली में 9 फरवरी से लेकर अब तक पेट्रोल के दाम में 3.28 रुपए और डीजल के दाम में 3.49 रुपए का इजाफा हो चुका है।

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इस पर केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दामों को कम करना उनके हाथ में नहीं है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। यह सब तब हो रहा है जब कच्चे तेल का दाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस सरकार की तुलना में लगभग आधा है।

अब जब पीएम मोदी ने इन बढ़ते दामों के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, तो यह जानना जरूरी है कि मनमोहन सरकार से लेकर मोदी सरकार तक पेट्रोल-डीजल पर कितना टैक्स बढ़ा है? सरकार की कितनी कमाई बढ़ गई है? और तेल कंपनियों को कितना फायदा हो रहा है? तो आइए समझते हैं इस गणित को…..

मई 2014, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तब कच्चे तेल की कीमत 106.85 डॉलर प्रति बैरल थी। एक बैरल 159 लीटर के बराबर होता है। मोदी के पीएम बनने के तीन महीने बाद सितंबर में कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर के नीचे चला गया। तब से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमत नीचे ही है।

बीजेपी सरकार के सत्ता में आने पर कीमतें घटी तो कांग्रेस ने इसे मोदी का नसीब बताया था। उस वक्त पीएम मोदी ने भी कहा था कि अगर मेरे नसीब से जनता का भला होता है, तो दिक्कत क्या है? कच्चे तेल की कीमतों के मामले में पीएम मोदी का नसीब सही में अच्छा रहा है। जनवरी 2021 में कच्चे तेल की कीमत 54.79 डॉलर प्रति बैरल आ गई। इसका मतलब मनमोहन सरकार के जाने के बाद कच्चे तेल की कीमत आधी हो गई है।

  क्रूड ऑयल की कीमत पेट्रोल की कीमत डीजल की कीमत
मई 2014 $ 106.85 ₹ 71.41 ₹ 56.71
मई 2015 $ 63.82 ₹ 63.16 ₹ 49.57
मई 2016 $ 45.01 ₹ 62.19 ₹ 50.95
मई 2017 $ 50.57 ₹ 68.09 ₹ 57.35
मई 2018 $ 75.25 ₹ 74.63 ₹ 65.93
मई 2019 $ 70.01 ₹ 73.13 ₹ 66.71
मई 2020 $ 30.61 ₹ 69.39 ₹ 62.29
फरवरी 2021 $ 62.88 ₹ 90.58 ₹ 80.97

 

सरकार का नसीब अच्छा पर जनता की नहीं

कच्चे तेल की कीमत में पीएम मोदी नसीब वाले हैं, लेकिन जनता का नसीब उनकी तरह अच्छा नहीं है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों मे कमी आने के बाद भी जनता को कोई राहत नहीं मिली है। उल्टा जनता पर ही टैक्स का बोझ बढ़ गया है।

इन आंकड़ों को देखिए, जब पीएम मोदी ने अपनी सरकार बनाई, तब पेट्रोल पर 34 प्रतिशत और डीजल पर 22 प्रतिशत टैक्स लगता था, लेकिन आज के समय पर पेट्रोल पर 64 और डीजल पर 58 प्रतिशत टैक्स लग रहा है। मतलब पहले की तुलना में हम पेट्रोल पर दोगुना और डीजल पर ढाई गुना टैक्स दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें- पेट्रोलियम के बढ़ते दामों के विरोध में रॉबर्ट वाड्रा ने निकाली साइकिल रैली, कहा- पिछली सरकारों पर दोष न डाले पीएम मोदी

सिर्फ तीन बार घटाया गया एक्साइज ड्यूटी

केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स एक्साइज ड्यूटी के रूप में लेती है। मई 2014 में प्रधानमंत्री मोदी जब सत्ता में आए, तो उस वक्त पेट्रोल पर 10.38 रुपए और डीजल पर 4.52 रुपए का टैक्स लगता था। मोदी सरकार ने 13 बार एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाया है, लेकिन अब तक सिर्फ तीन बार इसमें कटौती की है।

आखिरी बार मई 2020 में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाया था। इस वक्त एक लीटर पेट्रोल पर 32.98 रुपए और डीजल पर 31.83 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगती है। मोदी सरकार के आने के बाद केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 7 गुना टैक्स बढ़ाया है।

पेट्रोल डीजल
मई 2014 फरवरी 2021 मई 2014 फरवरी 2021
बेस प्राइज ₹47.13 ₹32.10 ₹44.45 ₹33.71
केंद्र का टैक्स ₹10.38 ₹32.90 ₹4.52 ₹31.80
डीलर कमीशन ₹2.00 ₹3.68 ₹1.19 ₹2.51
राज्य का टैक्स ₹11.90 ₹20.61 ₹6.55 ₹11.68
कुल कीमत ₹71.41 ₹89.29 ₹56.71 ₹79.70
सोर्स: IOCL, PPAC.GOV.IN

केंद्र सरकार की कमाई

एक्साइट ड्यूटी से केंद्र सरकार की अच्छी खासी कमाई होती है। मोदी सरकार ने इस कमाई को तीन गुना तक बढ़ा लिया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार 2013-2014 में सरकार ने सिर्फ एक्साइज ड्यूटी के जरिए 77,982 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं, 2019-20 में 2.23 लाख करोड़ से ज्यादा की कमाई हुई।

इसके अलावा 2020-21 के पहले छमाही अप्रैल से सितंबर तक मोदी सरकार ने 1.31 लाख करोड़ रुपए की कमाई की है। यदि इसमें अन्य टैक्स को भी जोड़ लिया जाए, तो ये कमाई 1.53 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। अगर कोरोना के कारण लॉकडाउन नहीं लगा होता तो यह आंकड़ा और भी ज्यादा होता।

राज्य सरकारें कितना लगाती हैं टैक्स

केंद्र सरकार ने तो एक्साइज ड्यूटी लगाकर अपनी झोली भर ली। अब बात करते हैं राज्य सरकारों के टैक्स की, क्योंकि केंद्र सरकार के द्वारा लगाया गया टैक्स पूरे देश में एक जैसा होता है, लेकिन राज्य सरकार में अलग-अलग सरकारें हैं, जिसकी वजह से हर राज्य में अलग-अलग टैक्स लगता है।

राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर तरह-तरह के टैक्स और सेस लगाती हैं। इनमें सबसे ज्यादा वैट/सेल्स टैक्स राजस्थान सरकार लेती है। यहां पर पेट्रोल पर 38 फीसदी और डीजल पर 28 फीसदी टैक्स वसूला जाता है। इसके बाद मणिपुर, तेलांगना और कर्नाटक आते हैं, जहां पर पेट्रोल पर 35 प्रतिशत या उससे अधिक टैक्स लगता है। वहीं, मध्य प्रदेश में पेट्रोल पर 33 प्रतिशत वैट लगता है।

राज्य सरकारों ने कितना भरा अपना पिटारा

राज्य सरकारों ने भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स लगाकर खूब कमाई की है, लेकिन यह कमाई केंद्र सरकार की तुलना में कम है। राज्य सरकारों ने 2012-14 में वैट और सेल्स टैक्स से 1.29 लाख करोड़ रुपए कमाए थे। 2019-20 में राज्यों की यह कमाई 55 प्रतिशत बढ़ गई। यानी 2 लाख करोड़ से ज्यादा कमाई हुई।

राज्य सरकारों ने 2020-21 की पहली छमाही में 78 हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की है। यहां पर भी वही कंडीशन लागू होती है जो केंद्र सरकार पर होती है। अगर कोविड की वजह से लॉकडाउन नहीं लगा होता तो यह कमाई और भी ज्यादा होती।

सरकारी कंपनियों के अच्छे दिन

देश में तीन बड़ी ऑयल कंपनियां हैं। जिनमें इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हैं। इन तीनों कंपनियों का मुनाफा काफी बढ़ा है। दिसंबर 2019 में इन तीनों कंपनियों ने 4,347 करोड़ रुपए कमाया। वहीं, दिसंबर 2020 में इनका मुनाफा 10,050 करोड़ रुपए हो गया।

पड़ोसी देशों में क्या है हाल?

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जबर्दस्त बढ़ोतरी होने के दौरान पड़ोसी देशो में इनकी कीमतों में लगातार कमी आई है। अप्रैल 2014 में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 66.17 रुपए और डीजल की कीमत 71.27 रुपए थी, लेकिन अब वहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 51.13 रुपए और डीजल 33 रुपए के आस-पास है। हमारे पड़ोसी देशों में सिर्फ बांग्लादेश ही ऐसा देश है जहां पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है, लेकिन यह इजाफा मामूली सा है।

 

 

 

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