Saturday, October 16, 2021

पश्चिम बंगाल में विकास के दावे का पोस्टमार्टम, जानें TMC ने प्रदेश में कितना किया विकास

न्यूज डेस्क। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, जिसे City of Joy कहा जाता है. वहां से 130 किमी दूर साउथ 24 परगना जिले में सुंदरबन आइलैंड स्थित है, जो बाघों के लिए मशहूर है. इस इलाके में गोसबा, बसंती, सागर, कैनिंग ईस्ट, सागर जैसी सीटे हैं. यहां पर चुनाव आयोग ने पारंपरिक धोती पहने हुए बाघ को अपनी प्रतीक बनाया है. लेकिन TMC (तृणमूल कांग्रेस) के विकास के दावों के बाद भी यहां के स्थानीय लोगों की बनुयादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाई हैं. इसके लिए उन्हें काफी करना पड़ रहा है.

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इस इलाके में हुगली, मातला, बिद्याधरी और गोसबा जैसी नदियां हैं. इसके बावजूद यहां पर पानी की समस्या है. इस इलाके में रहने वाले मानस सरदार ने बताया कि यहां पर पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि ट्यूबवेल लगवाने में करीब 1.25 लाख का खर्चा हो गया. लेकिन पानी की किल्लत बनी रही. पानी में आर्सेनिक की मात्रा भी अधिक है. कुछ साल पहले यहां पर धान की खेती बहुत अच्छी होती थी. लेकिन जमीन में सालिनिटी बढ़ने के कारण कई लोग मछली पालन करने लगे.

वहीं, विष्णुपद प्रधान, जो जिसारी फार्मर्स क्लब के लोकल मेंबर हैं. उनका कहना है कि यह आइलैंड भारी मुसीबत में है. यहां पर वॉटर लेवल बहुत नीचे चला गया है. जिसके कारण किसानों की समस्याएं बढ़ गई हैं. दिन पर दिन ज़मीन खारा होता जा रहा है. इसलिए हम दूसरे व्यवसाय की तरफ बढ़ रहे हैं.

बनियादी ढांचा है जर्जर

सुंदरबन में करीब 100 से ज्यादा आईलैंड हैं और इस वक्त करीब 270 बाघ हैं. यहां पर हर साल बड़े पैमाने पर टूरिस्ट आते हैं. स्वरोजित रॉय टूर ऑपरेटर हैं. वह कोलकाता में रहते हैं. सुंदरबन में पिछले 20 साल से काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस इलाके में ठहरने के लिए शायद ही कोई अच्छा होटल होगा. यहां पर सड़के काफी खराब हैं. जिसकी वजह से कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या बन गई है. क्या हम इसे इंटरनेशनल टूरिस्ट प्लेस बोल सकते हैं? यहां पर तो बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है.

राजनीतिक हिंसा से लिप्त हैं लोग

स्थानीय निवासी प्रलय ने कहा कि यहां पर गरीबी सबसे बड़ी समस्या है. लोगों को अब जाकर बिजली, सड़क और राशन जैसी बेसिक आवश्यताएं मिली हैं. लेकिन एक समय ऐसा था जब गांव के लोगों को भूखे रहना पड़ता था. जैसे-जैसे लोगों ने गहरे जंगल में जाना छोड़ दिया, वैसे-वैसे हमारा बाघों के साथ संघर्ष कम हो गया है. यहां पर डेवलपमेंट न होने के कारण राजनीतिक हिंसा एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में आप कह सकते हैं कि जिन बाघों की प्रवृत्ति सालों से हिंसक रही है. अब वह शांत हो गए. लेकिन लोग राजनीतिक हिंसा में डूब गए.

TMC ने किया विकास का दावा

इस मामले के संबंध में TMC विधायक जयंत नस्कर ने कहा कि हमारे कोशिशों की वजह से बाघों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है. साथ ही बाघों के साथ लोगों का संघर्ष कम हुआ है. बाघों के हमले में जान गवा चुके लोगों को मिलने वाली मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया है. अब उन्हें तीन लाख रुपए दिया जाता है. हमने गोसबा के आस-पास के इलाकों में गहरे कुएं खोदकर पाइप लाइन के जरिए हर घर को जोड़ा है. ताकि यहां पर रहने वाले लोगों को पानी की समस्या न हो.

नस्कर ने कहा, कि उन्होंने पानी बचाने के लिए अभियान शुरु किया है. जिससे फसलों की सिचाई के लिए पानी की कमी न पड़े. इसके अलावा हमने नदी के ऊपर तीन ओवर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा है. ताकि यहां पर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके. उन्होंने कहा कि हमें पूरा यकीन है कि बंगाल के रॉयस टाइगर जीत होगी न कि गिर लायन की.

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