Tuesday, August 3, 2021

नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे सुब्रह्मण्यम स्वामी, बढ़ सकती हैं कांग्रेस की मुश्किलें

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में निचली अदलात के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में निचली अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने से इंकार कर दिया था।

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11 फरवरी को निचली अदालत ने कहा था कि इस मामले की जांच पूरी होने के बाद वह सीआरपीसी की धारा 244 के तहत स्वामी की तरफ से दायर याचिका में साक्ष्य संबंधी आवेदन पर विचार करेगी।

निचली अदालत की सीआरपीसी का धारा 244 के तहत दायर याचिका में स्वामी ने उच्चतम न्यायालय के महासचिव, भूमि एवं विकास उप-अधिकारी और आयकर विभाग के एक उपायुक्त समेत कुछ गवाहों को समन भेजने का अनुरोध किया था। याचिका में स्वामी ने अदालत से इन अधिकारियों को दस्तावेजों को साबित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया था।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस-

नेशनल हेराल्ड मामले में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दिल्ली की पटियाला कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में स्वामी ने कांग्रेस और एसोसिएट जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल के अकाउंट और बैलेंस शीट से जुड़े कुछ डॉक्यूमेंट्स मांगे थे।

कांग्रेस ने कंपनी को दिया था लोन

एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड ( AJL) नेशनल हेराल्ड अखबार की पैरेंट कंपनी है। 26 फरवरी 2011 को कांग्रेस ने इसकी 90 करोड़ की देनदारियों का जिम्मा लिया था। यानी पार्टी ने कंपनी को 90 करोड़ रुपए लोन पर दिए थे। इसके बाद 5 लाख रुपए से यंग इंडिया कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी की 24 प्रतिशत की हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज की है।

यंग इंडिया को बनाया TAJL का स्वामी

इसके बाद TAJL ने 10-10 रुपए के नौ करोड़ शेयर यंग इंडिया को दे दिए। इसके बदले में यंग इंडिया को कांग्रेस पार्टी के 90 करोड़ रुपए का लोन चुकाना था। यंग इंडिया को इस 9 कारोड़ शेयर के साथ इस कंपनी के 99 प्रतिशत शेयर मिल गए। इसके बाद कांग्रेस ने लोन माफ कर दिया। इसका मतलब यंग इंडिया को मुफ्त में TAJL का स्वामित्व मिल गया।

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हेराल्ड हाउस कब्जा करने के लिए रची यह साजिश

इसको लेकर सुब्रह्मण्यम ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि यह सब कुछ शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 16 सौ करोड़ की बिल्डिंग पर कब्जा करने के लिए किया गया। स्वामी ने सोनिया-राहुल के खिलाफ अपनी याचिका में कहा था कि साजिश के तहत यंग इंडिया लिमिटेड को TAJL कंपनी की सम्पत्ति का अधिकार दिया गया।

साथ ही हेराल्ड हाउस को पासपोर्ट ऑफिस के लिए किराए पर दे दिया, जबकि केंद्र सरकार ने उस जमीन को समाचार पत्र चलाने के लिए दिया था, जिसके हिसाब से उस जमीन को व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

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हालांकि, दिल्ली की पटियाला हाईकोर्ट ने स्वामी की याचिका पर केस चलाने से मना कर दिया था और कहा था कि जांच समाप्त होने के बाद उनकी याचिका पर गौर किया जाएगा। कोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देने के लिए स्वामी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

 

 

 

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