Saturday, October 16, 2021

UNSC में बहस के दौरान प्रकाश जावड़ेकर ने किया शांति पाठ, देवभाषा संस्कृत से गूंजा पूरा परिषद

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जलवायु परिवर्तन पर बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पहली बार संस्कृत में संबोधन दिया. परिषद में जावड़ेकर ने अन्य वक्ताओं के साथ अपनी बहस की शुरूआत शुक्ल यजुर्वेद के हिम से की. उन्होंने अपने संबोधन में जिस मंत्र का उच्चारण किया है वो यह है-

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‘ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥”

यजुर्वेद के इस शांति पाठ मंत्र में ब्रहमांड के सभी तत्वों और कारकों से शांति बनाए रखने की प्रार्थना है। इस मंत्र का अर्थ है-

द्यलोक में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हो, औषध में शांति हो, वनस्पतियों में शांति हो, जल में शांति हो, विश्व में शांति हो, सभी देवतागणों में शांति हो, ब्रह्म में शांति हो, चारो और शांति हो, शांति हो, शांति हो।

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जलवायु में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है. जो भविष्य में फूड चेन को बदल देगा और हमारे जीविका पर संकट आ जाएगा. अगर हमने इसके लिए कुछ नहीं किया. तो आगे चलकर हमें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने सभी देशों को याद दिलाया कि विकसित देशों ने 2020 में जलवायु परिवर्तन के लिए हर साल 100 मिलियन डॉलर (लगभग 7 अरब रुपए) एकत्र करने को कहा था, लेकिन जलवायु परिवर्तन के समर्थन में यह बस एक छलावा निकला.

जलवायु परिवर्तन किस तरह से हम लोगों प्रभावित कर रहा है इसके बारे में बताते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, महिलाएं अपने परिवार को खाना, पानी और एनर्जी देती हैं, लेकिन उन्हें इन संसाधनों तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि G-20 में भारत एक मात्र देश है जिसने परिर्वतन को लेकर काम किया है. हमने न केवल पेरिस समझौते का पालन किया है बल्कि हम उससे आगे निकल गए हैं. भारत का सोलर एनर्जी प्रोग्राम दुनिया का सबसे तेज प्रोग्राम है. हमने 80 मिलियन घरों में खाना बनाने के लिए स्वच्छ ईंधन पहुंचाया है.

UNSC में जावड़ेकर ने सभी देशों से अनुरोध किया कि कोविड-19 के बचाव और रिकवरी में Low carbon डेवलेपमेंट के लिए एक साथ आएं. उन्होंने महात्मा गांधी के एक मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा- यहां पर सबकी आवश्यकता के लिए सब कुछ पर्याप्त है, लेकिन लोगों के लालच के लिए नहीं है.

 

 

 

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