Thursday, August 5, 2021

अगर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST में लाया गया तो क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें गिर जाएंगी?

न्यूज डेस्क। इन दिनों पेट्रोल-डीजल के दामों में आग लगी हुई है. इससे आम आदमी काफी परेशान है. विपक्ष भी इसे लेकर सरकार को घेर रही है. सोमवार को संसद में पेट्रोल-डीजल के बढ़े हुए दामों को लेकर काफी हंगामा हुआ. इस बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस समस्या के समाधान के लिए पेट्रोल-डीजल को GST के अंदर लाने की सलाह दी.

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पेट्रोल-डीजल को GST में लाने की मांग काफी समय से चल रही है. लेकिन कुछ राज्यों को इससे दिक्कत है. उनके दबाव के कारण यह आज तक GST के दायरे से बाहर है. यदि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स GST के अंदर आ जाते हैं तो इससे आम आदमी को क्या फायदा होगा? केंद्र और राज्य सरकारों को कितना नुकसान होगा? क्या सभी राज्यों को नुकसान होगा या कुछ राज्यों को? यह ऐसे प्रश्न हैं जिनके जवाबों ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST से बाहर रखा है.

हमने भी इस प्रश्न का जवाब ढूंढने की कोशिश की है कि अगर केंद्र सरकार और GST पर फैसले लेने वाले राज्यों के वित्तमंत्रियों के GST काउंसिल तय कर लें कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर सिंगल टैक्स लगेगा तो क्या होगा? बता दें, अगर ऐसा कर दिया गया तो मोटे तौर पर 15 से 30 रुपए प्रति लीटर की राहत पेट्रोल पर मिल जाएगी और डीजल पर 10 से 20 रुपए प्रति लीटर की. साथ ही इससे कुछ राज्यों को फायदा होगा लेकिन केंद्र सरकार की आय पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

आइए, हम आपको बताते है यह कैसे संभव है….

इस समय कैसे तय हो रहा रेट

अगर हम इंडियन ऑयल के आंकड़े देखें तो पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यादा ऊंचे नहीं हैं. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 33.54 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 35.22 रुपए प्रति लीटर है. इसके अलावा पेट्रोल पर डीलर का कमीशन 3.69 रुपए और डीजल पर 2.51 रुपए है.

लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इस पर इतना ज्यादा टैक्स लगा देती हैं कि इनके दाम बढ़कर 100 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच जाते हैं. यानी जितनी बेस प्राइस है. उससे दोगुना टैक्स वसूला जा रहा है. इस वक्त पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स GST के दायरे से बाहर हैं. जिसकी वजह से हर राज्य में अलग-अलग टैक्स वसूला जा रहा है और केंद्र सरकार का टैक्स अलग है.

GST लागू करने में क्या समस्या आ रही है

जब देश में GST किया गया तो कहा गया पूरे देश में एक जैसा टैक्स लगेगा. ऐसा हुआ भी, लेकिन पेट्रोल-डीजल और एल्कोहल को इससे बाहर रखा गया. इस पर सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि राज्यों को कुछ न कुछ अधिकार मिलने चाहिए. राज्यों को विकास कार्यों पर खर्च करने की आवश्यकता होती है. इसके लिए पैसा पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट से मिलता है. इसके बाद सरकार ने कहा कि जल्द ही आपसी सहमति बनाई जाएगी और इसे GST के दायरे में लाया जाएगा लेकिन कुछ राज्यों के विरोध की वजह से फैसला टलता चला गया.

SBI की रिसर्च टीम की रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के GST में आने से केंद्र और राज्य सराकरों ने अपने बजट प्रस्तावों में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से कमाई की जो उम्मीद रखी है, उसमें अड़चन आ जाएगी. लेकिन असल में उतना फर्क नहीं पड़ेगा. सरकारों को सिर्फ एक लाख करोड़ टैक्स कम मिलेगा यानी GDP का 0.4% कम. वहीं, इससे आम जनता को 10 से 20 रुपए प्रति लीटर तक राहत मिल जाएगी.

राज्यों को सिर्फ नुकसान होगा?

हर राज्य में VAT की दरें अलग-अलग होती हैं. अगर हम इन दरों पर एक नजर डाले तो करीब 19 राज्यों को 10 से 12 हजार का नुकसान होगा. कुछ राज्यों में इतना ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है कि पेट्रोल के दामों ने शतक लगा दिया है और जनता इससे काफी परेशान है. इन राज्यों में महाराष्ट्र प्रमुख है. जहां पर दो तरह का टैक्स लगता है.

यदि GST लागू होता है तो पूरे देश में एक जैसा टैक्स वसूला जाएगा. जिससे करीब 10,442 करोड़ का नुकसान होगा. इसके अलावा गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत 11 राज्य ऐसे भी हैं, जहां पर अन्य राज्यों की अपेक्षा पेट्रोल-डीजल पर कम टैक्स वसूला जा रहा है. अगर ऐसे में पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाया गया तो इन राज्यों की आय बढ़ जाएगी.

महाराष्ट्र (मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई)
पेट्रोल डीजल अंतर ( करोड़ रु. में)
वैट अन्य टैक्स वैट अन्य टैक्स  
26% 10.12रु. /लीटर 24% 3 रु. /लीटर -10,424

 

महाराष्ट्र (अन्य जिले)
पेट्रोल डीजल अंतर ( करोड़ रु. में)
वैट अन्य टैक्स वैट अन्य टैक्स  
25% 10.12 रु. /लीटर 21% 3 रु. /लीटर -10,424

 

राजस्थान
पेट्रोल डीजल अंतर ( करोड़ रु. में)
वैट अन्य टैक्स वैट अन्य टैक्स  
36% 1500 रु. / किली रोड डेवलपमेंट सेस 26% 1700 रु/ किली रोड डेवलपमेंट सेस -6,388

 

मध्य प्रदेश
पेट्रोल डीजल अंतर ( करोड़ रु. में)
वैट अन्य टैक्स वैट अन्य टैक्स  
33% 4.5 रु. /लीटर +1 सेस 23% 3 रु. /लीटर +1 सेस -5,489

 

तमिलनाडु
पेट्रोल डीजल अंतर ( करोड़ रु. में)
वैट अन्य टैक्स वैट अन्य टैक्स  
15% 13.02 रु. /लीटर 11% 9.62 रु. /लीटर -4,915

 

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