Tuesday, August 3, 2021

आखिर छह दिन बाद खुल गया स्वेज नहर का जाम, क्या होता अगर यह सालभर बंद रहता?

वर्ल्ड न्यूज डेस्क। स्वेज नहर, करीब 193.3 किमी लंबी, मिस्र में स्थित है. जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है. यह नहर व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है. 23 मार्च यानी मंगलवार को स्वेज नहर में एवर गिवन नाम का विशालकाय जहाज फंस गया था. जिसके कारण वहां पर जाम लग गया था. यह करीब छह दिन बाद यानी 29 मार्च (सोमवार) को खुला.

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इस जहाज को निकालने के लिए 10 टगबोट का इस्तेमाल किया गया. इस नहर के बंद होने से हर घंटे 3 हज़ार करोड़ का नुकसान हो रहा था. अगर यह नहर ऐसे ही ब्लॉक रहती तो वैश्विक व्यापार को बहुत तगड़ा झटका लगता.

कैसे फंस गया जहाज?

विशालकाय एवर गिवन जहाज चीन से 2 लाख टन से ज्यादा माल लादकर नीदरलैंड के पोर्ट रॉटरडैम जा था. इसे 31 मार्च को वहां पहुंचना था. लेकिन एक बड़ी समस्या सामने आ गई. जहाज स्वेज नहर से जा रहा था, मंगलवार सुबह करीब 7.40 बजे अचानक से तेज और धूलभरी आंधी चली. जिसके कारण जहाज ने अपना नियंत्रण खो दिया और नहर को ब्लॉक कर दिया.

यह जहाज 2018 में बनाया गया था. इसका संचालन एवरग्रीन मरीन नाम की कंपनी करती है. एवर गिवन जहाज के चालक दल में 25 भारतीय भी थे. नहर में जहाज के फंसने से अन्य व्यापारिक जहाजों का आवागमन बंद हो गया. स्वेज नहर के दोनों छोर पर करीब 150 जहाज फंसे थे. इनमें से कुछ जहाजों में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स तो कुछ में खाने पीने की चीज़े लदी हुई थीं.

 

स्वेज नहर इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

पश्चिमी और पूर्वी देशों के मध्य एक कड़ी तरह काम करने वाली स्वेज नदी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है. दुनियाभर के समुद्री कारोबार का 12% आवागमन इस नहर से होता है.

इस नहर के निर्माण से यूरोप और एशिया की बीच दूरी 6000 किमी कम हो गई. इसके साथ आने-जाने में लगने वाले समय में 7 दिन की कमी आई है. इसी वजह से एशिया और यूरोप के बीच समुद्री मार्ग तय करने के लिए इस नहर प्रयोग सबसे ज्यादा किया है.

साल 2020 में इस नहर से 19,000 से भी ज्यादा जहाजों का आवागमन हुआ था. नहर से रोजाना करीब 50 जहाज निकलते हैं. जिनमें 10 बिलियन डॉलर यानी 73 हजार करोड़ का माल लदा होता है.

स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाज टोल टैक्स देते हैं. इससे मिस्र सरकार अच्छी खासी कमाई होती है. साल 2020 में मिस्र सरकार ने केवल टोल टैक्स से 5 अरब डॉलर से ज्यादा कमाई की थी.

इसका आर्थिक महत्व और समझ में आता है जब यह नहर 7 महीनों के लिए बंद हो गई थी. तब पूरे यूरोप में खनिज तेल का अकाल पड़ गया था और अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में अधिकतर वस्तुओं के दाम ऊंचे हो गए थे.

The jam in the Suez Canal
फोटो क्रेडिट: मरीन ट्रैफिक

इसका भारत पर क्या पड़ता असर?

स्वेज नहर में जहाज़ फंसने से रोजाना लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा था. जिसका असर वैश्विक पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दामों पर पड़ता. भारत भी इसके प्रभाव से नहीं बच पाता. क्योंकि भारत इस नहर का इस्तेमाल उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और यूरोप से माल आयात और निर्यात करने के लिए करता है.

जिसमें फर्नीचर, चमड़े का सामान, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, मशीनरी, कपड़े इत्यादि शामिल हैं और भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार यह कारोबार करीब 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होता है.

स्वेज नहर का इतिहास

मिस्र में स्थित स्वेज नहर विश्व की सबसे बड़ी जहाजी नहर है. इसका निर्माण फ्रांसीसी इंजीनियर फार्जीनेंड डी लैप्सेसे की देख-रेख में हुआ था. इस नहर को स्वेज जलडमरूमध्य को काटकर बनाया गया है. इसका निर्माणकार्य 1859 में शुरू हुआ था. इसे बनने में 10 साल गए और 1869 में इसका इस्तेमाल होने लगा. नहर के निर्माण में 180 लाख पाउंड का खर्चा आया था.

इस नहर पर ब्रिटेन का अधिकार था. साल 1956 में ब्रिटेन ने इसे मिस्र को दे दिया. इसके बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल नासिर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया. जिसकी वजह से संकट खड़ा हो गया था. नासिर के इस कदम से ब्रिटेन और फ्रांस में हंगामा मच गया. क्योंकि इस नहर के संचालन के लिए जिस कंपनी को सौंपा था उसमें सबसे ज्यादा शेयर इन्हीं दोनों देशों के हैं. ब्रिटेन और फ्रांस ने नासिर को हटाने के लिए मिस्र पर हमला कर दिया. लेकिन अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की वजह से फ्रांस और ब्रिटेन को अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी. तब से इस नहर पर मिस्र का अधिकार है.

कब कब नहर हुआ बंद

स्वेज नहर कई बार बंद हो चुका है और इससे काफी नुकसान भी हुआ है. पहली बार 26 जुलाई 1956 में स्वेज नहर बंद हुआ था. जब इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था.

फिर जून 1967 में इजराइल का मिस्र, सीरिया और जॉर्डन से युद्ध हो गया. यह युद्ध करीब छह दिन चला था. इस दौरान गोलाबारी के बीच करीब 15 जहाज स्वेज नहर में फंस गए थे. इनमें से एक जहाज के डूब जाने के कारण नहर 8 साल के लिए बंद हो गई थी. जिसके चलते व्यापार भी आठ साल के लिए बंद हो गया था.

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