Wednesday, August 4, 2021

कोरोना के लिए चीन ऐसी जगह से सैंपल ले रहा है जिसे जानकर हर किसी को गुस्सा आएगा

वर्ल्ड न्यूज डेस्क। आपने अधिकतर देखा होगा कि कोरोना की जांच के लिए डॉक्टर्स नाक-मुंह से सैंपल लेते हैं. इसके लिए वो स्वाब को नाक या मुंह के अंदर तक डालते हैं. इस टेस्टिंग में लोगों को काफी तकलीफ होती है. लेकिन चीन में कोरोना टेस्टिंग का जो तरीका शुरू हुआ है, उसके सामने यह कुछ भी नहीं है.

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दरअसल, चीन ने अपने यहां आने वाले विदेशियों के लिए गूदा (ANUS) से स्वाब लेकर कोरोना की जांच कराना अनिवार्य कर दिया है. चीन के हवाई अड्डों पर इस तरह के कोरोना टेस्ट के कारण दुनियाभर के पैसेजरों को काफी परेशानी हो रही है.

चीन ने इस तरह के टेस्ट की शुरूआत जनवरी के आखिरी हफ्ते से की थी. चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने इस टेस्ट को शुरू करने की सिफारिश की थी. कमीशन ने दावा किया है कि गुदा से लिया गया स्वाब नाक-मुंह के सैंपल से बेहतर है और यह सटीक रिजल्ट देता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टेस्ट के लिए शंघाई और बीजिंग एयरपोर्ट पर बड़े-बड़े सेंटर बनाए जाएंगे. अभी तक छोटे सेंटरों में सैपल लिया जा रहा था.

बीजिंग के रेस्पिरेटरी डिजीज़ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर ली तॉन्गजेन ने जनवरी में वॉशिंगटन पोस्ट न्यूजपेपर को इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इसके बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि अगर हम गुदा से सैंपल लेकर कोरोना की टेस्टिंग करेंगे तो यह संक्रमित मरीजों की पहचान के लिए ज्यादा अच्छा होगा.

इसके अलावा उन्होने कहा था, गुदा से सैंपल उन लोगों का लिया गया है. जिन्हें क्वारंटीन किया गया है. क्योंकि इसका सैंपल लेने में ज्यादा कठिनाई होती है.

इस तरह की कोरोना टेस्टिंग को लेकर अमेरिका और जापान चीन से काफी नाराज हैं. उन्होंने कहा, यह टेस्ट सही नहीं है. इसको तुरंत बंद कर देना चाहिए. इसकी वजह से नागरिकों को काफी तकलीफ हो रही है. इसके बाद चीन ने मंगलवार को अमेरिकी डिप्लोमेट्स को इस टेस्ट से छूट दे दी.

अमेरिकी सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका का विदेश मंत्रालय इस तरह के टेस्ट के लिए कभी राजी नहीं होगा. हमें मालूम चला है कि हमारे स्टाफ को इस टेस्ट के लिए फोर्स किया जा रहा है. हमने चीनी विदेश मंत्रालय में इसके बारे में शिकायत की है. हालांकि, इसे चीन ने एक गलती बताया है. उसने कहा है कि डिप्लोमेट्स को इससे बाहर रखा जाएगा.

इस टेस्ट को लेकर जापान ने भी इसी तरह का विरोध जताया है. जापान की सरकार ने कहा, जापानी नागरिकों ने इस टेस्ट को लेकर चीन में हमारे दूतावास पर शिकायत दर्ज की है. यह उनके लिए मनोवैज्ञानिक परेशानी का कारण बन चुका है. 

कैसे किया जाता यह टेस्ट

इस टेस्ट के लिए सलाइन वॉटर ( नमक के पानी) में स्वाब को भिगोया जाता है. फिर उसे गुदा के अंदर 3-4 सेंटीमीटर तक डाला जाता है. इसके बाद उसे कई बार घुमाया जाता है. फिर स्वाब को निकालकर एक खास कंटेनर के अंदर रखा जाता है. इस सैंपल का प्रयोग कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए किया जाता है. चीन ने दावा किया है कि उसने इस तरह के टेस्ट करके कोरोना पर काफी हद तक काबू पाया है. इस समय चीन में कोरोना के सिर्फ 200 केस एक्टिव है.

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