Wednesday, August 4, 2021

आखिर सवालों के घेरे में क्यों है ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका की वैक्सीन

वर्ल्ड न्यूज़ डेस्क। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका ने हाल ही में कोविड वैक्सीन ट्रायल का नया डेटा जारी किया है. इससे पहले भी कंपनी ने डेटा जारी किया था लेकिन वह विवादों में घिर गया. डॉक्टरों के एक दल का आरोप था कि कंपनी ने ट्रायल के पुराने डेटा जारी किए हैं.

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ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका के द्वारा जारी किए कोवैक्सीन ट्रायल के नए डेटा पुराने डेटा से ज्यादा अलग नहीं है. वैक्सीन के प्रभावी होने की दर में मात्रा 3% की गिरावट आई है. यानी पिछले डेटा में 79% वैक्सीन प्रभावी बताई गई जो नए डेटा में 76% हो गई. परंतु इस नए डेटा में बताया गया है कि 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में वैक्सीन काफी असर काफी बढ़ा है. इससे पहले इस आयु वर्ग में वैक्सीन 80% प्रभावी बताई गई थी लेकिन इस नए डेटा में 85% बताया गया है. इसके साथ ही दावा किया गया है कि यह वैक्सीन लोगों को अस्पताल में भर्ती होने से बचाने में 100 फीसदी कारगर रही है.

इसे लेकर कंपनी ने कहा है कि जो नए डेटा जारी हुए हैं, वह पुराने डेटा का ही हिस्सा है. इसमें कुल 49 नए मामलों को जोड़ा गया है. जिससे वैक्सीन ट्रायल में वोलेंटियर की संख्या 190 हो गई है. यह सभी वोलंटियर कोरोना से ग्रसित से थे और इसके बाद उन्हें वैक्सीन दी गई. लेकिन अब इस नए डेटा के सामने आने से डॉक्टरों के उस दल पर सवाल खड़े होने लगे हैं जिन्होंने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका के वैक्सीन ट्रायल डेटा पर सवाल उठाए थे.

वैक्सीन पर सवाल उठने से लोगों का डगमगाया भरोसा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका की वैक्सीन पर अमेरिकी डॉक्टरों के सवाल उठने से दुनियाभर में गलत प्रभाव पड़ा है. कई देशों के लोगों को लग रहा है कि कंपनी गलत डेटा दे रही है. जिसके कारण वैक्सीन को लेकर लोगों में आत्मविश्वास की कमी आ गई है.

इससे पहले भी एस्ट्रेजनेका वैक्सीन दुनियाभर में छवि खराब होने का खतरा झेल चुकी. यूरोप के कई देशों में खबरें चली थी कि वैक्सीन लेने से खून में थक्के जम रहे है. जिसके बाद यूरोप के कई देशों ने एस्ट्रेजनेका वैक्सीन को बैन कर दिया था. डेनमार्क में तो अभी तक इस वैक्सीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है.

क्या खास है ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका में

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महामारी के दौरान एस्ट्रेजनेका ने वैक्सीन पर एक भी रुपए का मुनाफा न लेने का फैसला किया है. यहां तक की कंपनी ने अपने वैक्सीन फार्मूले को लाइसेंस फ्री कर दिया है ताकि दुनियाभर में तेजी से कोविड वैक्सीन का निर्माण हो और इस महामारी के चंगुल से जल्द जल्द बाहर निकलें.

इसके अलावा एस्ट्रेजनेका WHO के साथ मिलकर दुनिया के गरीब देशों में वैक्सीन पहुंचाने का काम कर रही है. ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजनेका के फार्मूले से भारत की वैक्सीन कंपनी सीरम इंडिया इंस्टीट्यूट तेजी से वैक्सीन निर्माण कर रही है. जिन्हें अफ्रीकी देशों में मुफ्त दिया जा रहा है. जबकि मोडर्ना और फाइजर वैक्सीन कोवैक्स अभियान का हिस्सा नहीं है और ये वैक्सीन से करोड़ों कमा रही हैं.

यह भी पढ़ें- United Nation में भारत ने क्यों नहीं दिया श्रीलंका का साथ?

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