Saturday, October 16, 2021

अमेरिका में योग विधेयक पर लगी रोक, रूढ़िवादियों ने दिखाया हिंदुत्व का डर

वर्ल्ड न्यूज डेस्क। शारीरिक और मानसिक तौर से फिट रहने के लिए योग पूरी दुनिया में फेमस है. लेकिन अमेरिका के अलाबामा में योग दशकों से बैन है. इस बैन को हटाने के लिए अमेरिकी सरकार योग बिल लाई. जिसे लेकर विवाद हो गया. वहां के रूढ़िवादी संगठनों ने इस बिल का पूरजोर विरोध किया. जिसके बाद यह बिल राज्य की सीनेट में रुक गया.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब बिल को लेकर सार्वजनिक सुनवाई हो रही थी तभी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि योग से हिंदू धर्म को बढ़ावा मिलता है. जिसके बाद सीनेट की समिति ने इसे रोक दिया.

क्या है इस बिल में

अलबामा के बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने 1993 में स्कूलों में योग, मेडिटेशन आदि की पढ़ाई पर बैन लगा दिया था. इस बैन को हटाने के लिए इस बिल को लाया गया था. चलिए जानते हैं इस बिल में क्या खास है….

1. इस बिल के अनुसार स्टूडेंट को योग को ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर लेने की छूट देता है. यह स्टूडेंट पर निर्भर करेगा कि उसे यह सब्जेक्ट लेना है या फिर कोई दूसरा सब्जेक्ट.

2. हर स्थानीय बोर्ड इसका निर्धारण खुद करेगा कि योग की पढ़ाई कहां, कब और कितनी देर तक होगी.

3. योग की सभी मुद्राओं का नाम अंग्रेजी में किया जाएगा

4. पाठ, मंत्र, मंत्र, मुद्रा और नमस्ते को बैन किया गया है.

सत्ताधरी बाइडन की पार्टी समर्थन में

इस बिल को लेकर एक तरफ रूढ़िवादी संगठन विरोध कर रहे हैं, वहीं सत्ताधारी जो बाइडेन वाली पार्टी के नेताओं ने इस बिल का समर्थन किया है. डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जेरेमी ग्रे ने इस बिल का समर्थन किया.

जेरेमी अलबामा के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के सदस्य हैं. उन्होंने बताया कि फुटबॉल के जरिए वह योग के संपर्क में आए थे. योग करने से उन्हें आनंद मिला और एक योग ट्रेनर बन गए. नया बिल लाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि आप लोगों के मन को नहीं बदला जा सकता है. मैं पिछले 10 साल से योग कर रहा हूं और चर्च भी जा रहा हूं. मैं तो पूरी तरह से ईसाई हूं.

क्या है विरोधियों को तर्क

अमेरिका के हर राज्य में दो सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट होता है. कोई भी बिल दोनों सदनों से पारित होने के बाद ही कानून बनता है. जेरेमी ग्रे और डेमोक्रेटिक के अन्य सदस्यों ने इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में पास करा लिया. लेकिन मामला सीनेट में फंस गया. सीनेट में बिल पर सार्वजनिक चर्चा के दौरान रूढ़िवादी संगठनों ने इसका जबरदस्त विरोध किया. जिसके बाद इस बिल को रोक दिया गया.

विरोधी संगठनों में से एक गैर-सरकारी संगठन ईगल फोरम ऑफ अलाबामा के डायरेक्टर बेकी गेरित्सन का कहना है कि योग हिंदू धर्म का अहम हिस्सा है. अगर यह बिल पास होता है तो योग सिखाने वाले स्कूलों में ऐसे घुस जाएंगे जैसे वो कोई किंडरगार्डन हो. वे बच्चों को काल्पनिक दुनिया मे ले जाएंगे जो आध्यात्मिक एक्सरसाइज है और यह सब बच्चों भी माता पिता की नजरों से दूर होगा. जो किसी भी तरह से उचित नहीं है.

हालांकि, बिल पर रोक लगने के बाद सीनेट की न्यायिक समिति के अध्यक्ष ने कहा कि हम बिल को दोबारा सदन में लाएंगे. वहीं, यूनिवर्सल सोसायटी ऑफ हिंदुइज्म के चेयरमैन राजद जेन ने कहा कि योग सभी धर्मों के लोगों के लिए है. योग करने वाले व सिखाने वाले अधिकतर टीचर गैर हिन्दू हैं और वे ही रहेंगे.

yoga bill
सोर्स- पीटीआई

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