Saturday, October 16, 2021

हरिद्वार: कुंभ मेला और तबलीगी जमात में जमीन आसमान का फर्क

नई दिल्ली। उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ मेला चल रहा है, जो 1 अप्रैल को शुरु हुआ था. यह मेला इतना भव्य है कि इसे देखकर इंटरनेट पर बैठे लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं. नफरत और दुर्भावना लिए सोशल मीडिया के तथाकथित सेक्यूलर लोग इसकी तुलना तबलीगी जमात से कर रहे हैं.

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जबकि दोनों में जमीन-असमान का फर्क है. फिर भी देश के तथाकथित सेक्यूलरिज्म को बचाने के नाम पर एक निराश और हताश वर्ग इसे तबलीगी जमात से जोड़ने में तुला है. ताकि वह मरकज के लोगों को सही ठहरा सकें. ये लिबरल-वामपंथी और कट्टरपंथियों का समूह गलत जानकारी फैलाकर यह साबित करने में तुला है कि कुंभ में कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और अपने-अपने हिसाब से प्रोपेगेंडा सेट करने में लगे हुए हैं.

बता दें, उत्तराखंड सरकार ने कुंभ मेले के आयोजन के लिए कोरोना के सख्त नियम बनाए हैं और अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे नागरिकों को सख्ती से नियमों का पालन कराएं. मेले में आने से पहले लोगों का कोविड आरटी पीसीआर टेस्ट हो रहा है. जब इसकी रिपोर्ट निगेटिव आती है तभी लोगों को मेले में जाने को मिलता है. बस यह रिपोर्ट 72 घंटे से अधिक पुरानी न हो. इसी वजह से पिछले साल की तुलना में इस साल मेले में कम भीड़ है.

इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने रास्ते में कोविड19 टेस्ट सेंटर बनाए हैं. हरिद्वार आने वाले यात्रियों के पास या तो पहले से ही कोविड टेस्ट की रिपोर्ट हो या फिर वह स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनी जांच कराए. मेले के हर पौड़ी में सैनिटाइजर डिस्पेंसर है. इसके साथ विशेष कोविड19 आईसोलेशन सेंटर बनाए गए हैं. मेले में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का खास ध्यान रखा गया है. इसके लिए सख्त नियम भी बनाए गए हैं. जबकि मरकज निजामुद्दीन में तबलीगी जमात वालों ने ऐसी व्यस्वस्था नहीं कर रखी थी.

महामारी के शुरुआती दौर में जब हमारे पास कोविड से लड़ने के लिए सुविधाएं नहीं थी और कोरोना वायरस पैर पसार रहा था. उस समय जमातियों ने कोरोना नियमों को नजरअंदाज किया. जिसके कारण हजारों लोग संक्रमित मिले थे. मरकज के लोगों ने जानबूझकर हालात खराब करने की कोशिश की. अधिकारियों ने सामने आकर टेस्ट कराने की मांग की तो वह जानबूझकर सामने नहीं आए और देशभर में वायरस को फैलाया.

जब प्रशासन ने जमातियों को ट्रेस कर आइसोलेट करने की कोशिश की तो वे हिंसक हो गए, क्योंकि वे क्वारंटीन नहीं होना चाहते थे. इतना ही नहीं जब उन्हें अस्पताल और क्वारंटीन सेंटरों में रखा गया तो वहां पर भी इन जमातियों ने अपनी घृणित मंशा का परिचय दिया. जमातियों ने नर्सों के साथ यौन उत्पीड़न किया और वायरस फैलाने के उद्देश्य से डॉक्टरों पर थूका.

इन्हीं हरकतों की वजह से मरकज के लोगों की इमेज खराब हुई. अगर जमातियों का यह मामला मरकज तक ही सीमित रहता तो शायद लोग इनके साथ खड़े होते. लेकिन इन लोगों ने गाजियाबाद के अस्पताल में काफी घटिया हरकत की. ये अस्पताल में नंगे होकर घुमते थे और महिला स्वास्थकर्मियों के साथ छेड़छाड़ करते थे. इतनी ही नहीं जमातियों ने खुले में शौचकर सरकारी तंत्र को चुनौती दी थी.

उदाहरण के तौर पर अगर आपको बताऊं तो आप लोगों को याद होगा दिल्ली में जमातियों के स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की घटना सामने आई थी. कानपुर के जिला अस्पतालों में इन लोगों ने कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार किया था. कुछ जगहों पर जमातियों ने गौमांस की मांग की थी. ये तो कुछ ही घटनाएं हैं इनके कारनामों की लिस्ट बहुत लम्बी है अगर लिखा गया तो जगह खत्म हो जाएगी लेकिन इनके कारनामें नहीं.

जबकि कुंभ मेले की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है. यहां पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई जिस तरह की मरकज के लोगों ने की. इस मेले में लोग धार्मिक आयोजनों को देखने आते हैं और ज्ञान लेने आते हैं. जो लोग जमातियों की तुलना इस कुंभ मेले से कर रहे हैं, उन्हें एक बार पीछे जाकर उनकी हरकतों के बारे में पता लगाना चाहिए.

जानकारी के आधार पर देख सकते हैं कि दोनों घटनाओं में जो समानता बताई जा रही है वह कितनी झूठी और आधारहीन है. फिर भी लोग इस तरह की तुलना को बकवास और झूठा बता रहे हैं.

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट में कुरान के खिलाफ डाली याचिका खारिज, वसीम रिजवी पर लगाया 50 हजार का जुर्माना

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