Tuesday, August 3, 2021

कोरोना महामारी की इतनी भयावह स्थिति का जिम्मेदार कौन ?

कोरोना महामारी ने देश में तबाही मचा रखी है. महामारी की दूसरी लहर इतनी भयावह है कि पहली बार भारत में बीते 24 घंटे में साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. दुनियाभर के देशों में भी कोरोना की दूसरी लहर आई है लेकिन एक दिन मे जितने मामले भारत में सामने आए हैं उतने और किसी देश में नहीं आए हैं. 24 घंटे में नए केसेज के मामले में हमने अमेरिका और ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है और अब हम पहले नंबर पर हैं. एक्टिव केस भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं.

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तेजी से मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पतालों में बेड, दवाइयां और ऑक्सीजन की भारी किल्लत हो गई है. जिसके कारण मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. कई मामले तो ऐसे सामने आए हैं कि इलाज न मिल पाने के कारण लोगों ने सड़कों पर ही दम तोड़ दिया. श्मशानों में भी दाह-संस्कार करने की जगह नहीं है.

संकट के इस समय में सरकारें जिम्मेदारी लेने के बजाए एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. हालांकि, सियासी लड़ाई के बाद दूसरे देशों से मदद लेकर ऑक्सीजन और दवाईयों की आपूर्ति की जा रही है. अब हमारे सामने प्रश्न यह कि महामारी की दूसरी लहर आई क्यों?  इसका जिम्मेदार कौन?  यह इतनी घातक क्यों होती जा रही है? और यह कैसे रुकेगी?

कोरोना की सेकेंड वेव को समझने के लिए हमें महामारी के विज्ञान को समझना होगा. जब कोई महामारी आती है तो उसकी एक से ज्यादा लहर आना नॉर्मल बात है. 1918 में स्पैनिश फ्लू के दौरान हमने यह देखा है. उस वक्त भी हमारे यहां दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी. कोरोना के मामले में हमने अलग-अलग देशों में यही देखा है.

कोरोना की दूसरी लहर को लेकर महामारी विज्ञान में तीन बातों को देखा जाता है, पहले एजेंट यानी वायरस, होस्ट ( इंसान) और एनवायरमेंट. इसी पर तय होता है कि किसी महामारी की लहर कितनी खतरनाक होगी. आइए इन तीनों बातों को बारी-बारी समझते हैं.

सबसे पहले हम बात करेंगे एजेंट की यानी वायरस की. अन्य देशों में हमने कोरोना वायरस के डबल म्यूटेंट और ट्रिपल म्यूटेंट को देखा लेकिन फिर भी भारत में वायरस की जीनोम स्टडी बड़े पैमाने पर नहीं की गई. जो दूसरी लहर का आधार बना. अब वायरस पहले से ज्यादा आक्रामक हो चुका है. यह शरीर में पहले से बनी इम्यूनिटी को चकमा दे रहा है. जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं.

अब बात करते हैं होस्ट यानी इंसान के बारे में, जब देश में कोरोना की पहली लहर आई तो पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया ताकि संक्रमण की चेन न बने. लॉकडाउन के कारण लोग घरों के अंदर कैद हो गए. उनके व्यवहार में बदलाव भी आया. जिसका नतीजा यह निकला कि मुंबई में पहला लहर के दौरान संक्रमण झुग्गी-बस्तियों के मुकाबले ऊंचे तबके में बराबरी से था. लेकिन इस बार ज्यादातर केस हाईराइज से आए हैं. यानी इससे साफ है कि लॉकडाउन हटने के बाद लोगों ने यह मान लिया कि वायरस खत्म हो गया है.

जिसके कारण लोग लापरवाही करने लगे और यही आज हम सब पर भारी पड़ रहा है. कितने लोगों के अंदर एंटीबॉडी है? इसे लेकर जनवरी में नेशनल सर्वे किया गया. सर्वे में पता चला कि सिर्फ 10% लोगों के अंदर एंटीबॉडी है. इसका मतलब 90% लोग ऐसे थे जिन्हें कोरोना का खतरा था. कोविड प्रोटोकॉल न पालन करने की वजह से लोग इसकी चपेट में आए.

आखिरी बात एनवायरमेंट की करते हैं यानी इसे लेकर देश में माहौल क्या रहा? इस महामारी के दौर में सरकारें कहती रहीं कि लोग कोविड नियमों का सख्ती से पालन करें. लेकिन जो लोग यह कह रहे थे, उन्होंने ही इसका पालन नहीं किया. कथनी और करनी में अंतर देख लोगों का भरोसा टूटा. कुंभ और चुनावी रैलियों में हमने देखा ही. जिसके कारण लोग कहने लगे कि कोरोना-वोरोना कुछ नहीं है. यह सब हवाबाजी है. जिसके चलते लोगों ने मास्क पहनना छोड़ दिया.

इन तीनों फैक्टर की भागीदारी दूसरी लहर में साफ दिख रही है. ये तीन फैक्टर्स तय करते हैं कि महामारी की लहर कितनी भयानक होगी. पिछले साल जब अन्य देशों मे इसकी दूसरी-तीसरी लहर आ रही थी तब हमने सोचा कि यह महामारी जा चुकी है. जो हमारी सबसे बड़ी चूक थी. अगर उसी वक्त दूसरी लहर की तैयारी कर ली होती और नागरिक भी सावधानी बरतते तो देश में जो आज स्थिति है वो नहीं होती.

देश में जो हालात हैं वो 14 दिन पुराने मामलों का नतीजा है. इस दौरान वायरस शरीर में जाकर इनक्युबेशन (यदि कोई इस वायरस की चपेट में आता है, तो जरूरी नहीं है कि बीमारी के लक्ष्ण तुरंत ही नजर आए. इसका असर दिखने में 2 से 14 दिन तक का समय लग सकता है) में रहा.

होली और चुनावी रैलियों जैसे बड़े इवेंट ने संक्रमण को फैलाने में फ्यूल का काम किया है. इस लहर की पीक कब आएगा यह कहना बेहद मुश्किल है. लेकिन यह इससे तय होगा कि लोगों का व्यवहार क्या है और आगे क्या रहता है? पीक आने के बाद संक्रमितों की संख्या मे कमी आएगी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अचानक से 10 हजार केस हो जाएंगे. एक हफ्ते मे लोगों का व्यवहार तय करेगा कि वायरस का असर आगे क्या होगा.

यह भी पढ़ें- अब 18 साल से अधिक उम्र वालों को लगेगी वैक्सीन लेकिन कैसे?

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