Tuesday, August 3, 2021

कैमरे में कैद इतिहास की कुछ तस्वीरें, जिनकी दिलचस्प कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे

हम अपने इतिहास को किताबों और तस्वीरों के रूप में संजोकर रखते हैं. ताकि हम आने वाली पीढ़ी को इतिहास के बारे में बता सकें और वे इससे सीखकर भविष्य की नींव रख सकें. 23 अप्रैल इन्हीं किताबों और तस्वीरों के लिए जाना जाता है. इस दिन वर्ल्ड कॉपीराइट डे है. इस मौके पर हम आपके के लिए इतिहास से जुड़ी कुछ तस्वीरें सामने लाए हैं. जिनके पीछे की दिलचस्प कहानी जानकर आप हैरान हो जाएंगे.

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आज के समय बुलेट प्रूफ जैकेट बेहद आम बात लगती है. लेकिन आपने कभी यह सोचा है कि जिस व्यक्ति ने पहली बार इसका इस्तेमाल किया होगा, उस समय गोली चलाने वाले और बुलेट प्रूफ जैकेट पहनने वाले की क्या हालत हुई होगी? यह बात साल 1923 की है. जब न्यूयॉर्क के प्रोटेक्टिव कॉर्पोरेशन ने पुलिसकर्मियों के लिए एक हल्की-फुल्की जैकेट बनाई और तय किया कि इसका लाइव टेस्ट होगा. कंपनी ने लाइव टेस्ट के लिए अपने ही एक सेल्समैन को वो जैकेट पहनाई और दूसरे सेल्समैन को गोली चलाने को कहा. यह सुनकर वहां पर मौजूद लोग हैरान थे और अनजाने डर से भयभीत थे. लेकिन गोली जब चलाई तो वह जैकेट के पार नहीं गई. इस तरह से बुलेट प्रूफ जैकेट का टेस्ट सफल रहा.

इस तस्वीर में एक 106 साल की बुजुर्ग महिला हाथ में सैनिकों वाली बंदूक लिए बैठी हैं. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि इन्होंने बंदूक को सिर्फ पकड़ा भर नहीं है बल्कि वह इसे चलाने की पूरी क्षमता रखती थीं. बता दें, यह तस्वीर एशियाई देश आर्मेनिया की एक नैनी  की है.

सुरक्षा के लिए हेलमेट बेहद जरूरी है, चाहे आप सड़क पर हों, युद्ध के मैदान में या क्रिकेट, बेसबॉल या फुटबॉल के मैदान में. लेकिन जब पहली बार किसी ने हेलमेट को बनाया होगा और दावा किया होगा कि यह हमारे सर को सुरक्षित रखेगा. तो क्या लगता है किसी ने उसका यकीन किया होगा? यह तस्वीर ब्रिटिश आविष्कार डब्ल्यूटी वॉरेन की है जिन्होंने फ्लाइट हेलमेट का आविष्कार किया था. उस दौर में सिर पर चोट लगने से पायलटों की जान चली जाती थी. इस समस्या से निपटने के लिए डब्ल्यूटी वॉरेन ने हेलमेट बनाया. लेकिन हेलमेट की उपयोगिता बताने के लिए उन्हें लोगों के सामने दीवारों और लोहे के दरवाजों पर सिर लड़ाना पड़ा. 

कोरोना महामारी ने जब हमारी लाइफ में एंट्री नहीं मारी थी तब हम मॉल कल्चर का बड़े चाव से लुफ्त उठाते थे. लेकिन इस महामारी के आने के बाद हमारा मॉल जाना कम हो गया है. मॉल में एक जगह पर सामान मिल जाता है लेकिन आज से 20 साल पहले  एक बिल्डिंग में एक से अधिक दुकानों का खुलना लगभग नामुमकिन सा था. हालांकि साल 1900 में लंदन में रहने वाले एक शख्स ने इसकी नींव डाली थी, जब उसने एक दूध और मिठाई की दुकान के नीचे खाली एक छोटी खिड़की में जूते की दुकान खोल दी थी. इसे अब तक सबसे छोटी दुकान कहा जाता है.

यह भी पढ़ें- अब 18 साल से अधिक उम्र वालों को लगेगी वैक्सीन लेकिन कैसे?

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