Wednesday, August 4, 2021

केंद्र सरकार ने मैपिंग पॉलिसी में किए अहम बदलाव, क्या बदल जाएगा गूगल मैप देखने का तरीका?

इंटरनेट के दौर में मैप हमारे जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। आज हर जगह इसका इस्तेमाल हो रहा है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं, तो रास्ता ढूंढने के लिए गूगल मैप का इस्तेमाल करते हैं। फूड डिलीवरी ऐप पर खाना ऑर्डर करने पर या ई-कॉमर्स साइट पर सामान लेने पर या फिर टैक्सी बुक करने पर हम उसकी ट्रैकिंग मैप्स पर ही देखते हैं। इन्हें जियोस्पेशियल ( भू-स्थानिक) डेटा और सर्विसेज कहते हैं।

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हाल ही में सरकार ने इन मैप्स की मैपिंग पॉलिसी में कुछ हम बदलाव किए हैं। भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने जियोस्पेशियल डेटा और सेवाओं को सार्वजनिक कर दिया है। इसके बारे में सरकार का कहना है कि जो सर्विसेज ग्लोबल लेवल पर उपलब्ध हैं, उनको रेगुलेट करने की जरूरत नहीं है।

विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले को अहम बदलाव माना है। अभी तक निजी व्यक्तियों और कंपनियों को डाटा इस्तेमाल करने के लिए जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन एक्ट 2016 के तहत सरकार से परमिशन लेनी पड़ती थी, लेकिन अब नई पॉलिसी तहत के इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।

GPS के मुकाबले में इसरो के स्वदेशी नाविक ( NavIC) के लॉन्च के बाद से सरकार ने नेविगेशन मैपिंग और जियोस्पेशिल डाटा पर आत्मनिर्भता लाने के लिए कई बड़े सुधार किए हैं।

गांव-गांव में हो रही है GEO Tagging

इस समय हमारे इफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट से लेकर गांव के घरों की GEO Tagging की जा रही है, ताकि वो तय समय पर पूरे किए जा सकें। यहां तक कि आज गांव के घरों की मौपिंग ड्रोन से की जा रही है, टैक्स से जुड़े मामलों में ह्यूमन इंटरफेस कम करने की कोशिश की जा रही है।

क्या होता है जियोस्पेशिय डेटा?

किसी का घर खोजने के लिए हमे उसके एड्रेस की जरूरत पड़ती है। आप जब शहर मोहल्ले या फिर उस गली के कैंपस तक पहुंचते हैं, तब आपको घर मिलता है। इसी तरह किसी लोकेशन का तकनीकि पता जियोस्पेशियल या भू-स्थानिक डेटा कहलाता है।

जियोस्पेशियस डेटा आपको सटीक लोकेशन की जानकारी देता है। साथ ही जमीन के ऊपर और अंदर की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करता है। इसके अलावा मौसम, प्राकृतिक गतिविधियों, मोबिलिटी डेटा से लेकर हर की जानकारी इसी में आती है। अगर सरल भाषा में कहा जाए तो जो कुछ भी जमीन पर है वह जियोस्पेशियल डेटा है।

इस बारे में एसरो इंडिया टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के प्रेसिडेंट आगेंद्र कुमार ने बताया कि हर जगह की स्पेसिफिक लोकेशन अक्षांश और देशांतर रेखाओं से तय होती है। यह डेटा स्मार्ट सिटी प्लानिंग से लेकर हर तरह के लॉजिस्टिक औऱ सप्लाई चेन मैनेजमेंट में काम आती है।

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कैसे होता है जियोस्पेशियल डाटा का इस्तेमाल?

केंद्र सरकार के मुताबिक नई मैपिंग पॉलिसी नदियों को जोड़ने, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने, स्मार्ट सिटी इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम लागू करने जैसे नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाने के काम में अहम भूमिका निभाएगा।  डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, ई-कॉमर्स, ड्रोन मूवमेंट, सप्लाई चेन और शहरी परिवहन जैसी नई टेक्नोलॉजी के लिए सटीक मैपिंग की जरूरी है।

खेती, फाइनेंस, कंस्ट्रक्शन, माइनिंग और लोकल एंटरप्राइज जैसी प्रत्येक आर्थिक गतिविधियां किसी ने किसी तरह से मैपिंग डेटा पर निर्भर हैं। केंद्र सरकार की इस नई पॉलिसी का लाभ किसान व छोटे व्यापारियों से लेकर कंपनियों को मिलेगा। केंद्र सरकार ने यह घोषणा उस वक्त की है, जब मैपिंग टेक्नोलॉजी का एडवांसमेंट हो रहा है।

स्टार्टअप्स को क्या होगा फायदा?

प्रो. आगेंद्र कहना है कि यदि शहर में ब्रिज बनाने या कोई स्मार्ट सिटी बनाने का प्रोजेक्ट है तो उसके लिए जियोस्पेशियल डेटा का सर्वे होता है। पुरानी पॉलिसी में इस सर्वे के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी, जिसमें तीन से चार महीने लग जाते थे। इससे प्रोजेक्ट की कॉस्ट बढ़ती थी और प्रोजेक्ट पूरा होने में समय भी बहुत लग जाता था। पर अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।

आगेंद्र ने बताया कि नई पॉलिसी के अनुसार डेटा कलेक्शन करने में आसानी होगी। इससे कई क्षेत्रों में GIS एप्लिकेशन के नए अवसर सामने आएंगे। इंश्योरेंस, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, बैंकिंग जैसे निजी क्षेत्र भी एनालिटिक्स के साथ नए अवसर का लाभ उठा पाएंगे।

नई पॉलिसी से इकोनॉमी को कैसे होगा फायदा?

नई पॉलिसी के संबंध में आगेंद्र ने बताया कि इस समय जियोस्पेशियल डेटा का मार्केट 25 हजार करोड़ रुपए का है। सरकार को उम्मीद है कि यह मार्केट 2030 तक 99 हजार करोड़ रुपए का हो जाएगा। मतलब कुछ सालों में इसके चार गुना होने की उम्मीद रखी जा रही है। इसके अलावा यह भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगा।

ग्लोबलाइजेशन जितना बड़ा बदलाव

लास्ट -माइल डिलीवरी करने वाले स्टार्टअप पिकअप के CEO और फाउंडर हेमंत चंद्र ने बताया कि भारत में सड़क के रास्ते लॉजिस्टिक का करीब 11 लाख करोड़ का बाजार है। इसमें 2 लाख करोड़ तक का बाजार तो सिर्फ अंतिम सिरे तक माल डिलीवरी का है। उन्होंने कहा, सरकार की नई मैपिंग पॉलिसी लॉजिस्टिक इंडस्ट्री के लिए 1991 के ग्लोबलाइजेशन के जितना बड़ा बदलाव है । जियोस्पेशियल डेटा के इस्तेमाल से बेहतर मैपिंग प्रोसेस, एक्सप्रेस डिलीवरी की लागत कम करने में काम आएगा।

लॉजिनेक्स्ट के CEO ध्रुविल संघवी ने कहा, सरकार की अब तक ऐसी नीतियां रही हैं, कि स्टार्टअप सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करके इनोवेशन नहीं कर सकते थे, लेकिन अब यह मार्केट खुल गया है। निश्चित तौर पर लॉजिस्टिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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